छत्तीसगढ़/बिलासपुर (समाचार मित्र) छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भरण-पोषण को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल सौतेली मां होने के आधार पर किसी वृद्ध, निःसंतान और बेसहारा विधवा महिला को उसके कानूनी अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने 77 वर्षीय निःसंतान विधवा महिला को उसके तीन सौतेले बेटों से कुल ₹9,000 प्रतिमाह भरण-पोषण दिलाने का आदेश दिया है। अदालत के निर्देश के अनुसार तीनों सौतेले बेटे ₹3,000-₹3,000 प्रति माह देंगे। यह भुगतान सितंबर 2026 से शुरू किया जाना है
फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट ने किया निरस्त
महिला ने अपने तीन सौतेले बेटों से भरण-पोषण की मांग करते हुए फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसका कहना था कि पति की मृत्यु के बाद वह असहाय हो गई और सौतेले बेटों ने उसकी देखभाल बंद कर दी।
फैमिली कोर्ट ने इस आधार पर महिला की मांग खारिज कर दी थी कि संबंधित युवक उसके सौतेले बेटे हैं। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए कहा कि परिस्थितियों के अनुसार निःसंतान, विधवा और स्वयं का भरण-पोषण करने में असमर्थ सौतेली मां को सौतेले बेटों से भरण-पोषण मिल सकता है।
धारा 144 BNSS के तहत मिला अधिकार
अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 144 के तहत महिला के भरण-पोषण के दावे को स्वीकार किया। यह प्रावधान पुराने CrPC की धारा 125 के समान भरण-पोषण संबंधी व्यवस्था से जुड़ा है।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Kirtikant D. Vadodaria बनाम गुजरात राज्य सहित पूर्व न्यायिक दृष्टांतों का हवाला देते हुए माना कि केवल सौतेली मां का रिश्ता होना उसके भरण-पोषण के दावे को समाप्त नहीं करता।
⚖️ फैसले का महत्व
इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि यदि सौतेली मां निःसंतान, विधवा और स्वयं का भरण-पोषण करने में असमर्थ है, तो परिस्थितियों के आधार पर वह सौतेले बेटों से कानूनी रूप से भरण-पोषण की मांग कर सकती है।

