शिक्षक दिवस विशेष पर आज हम एक ऐसे शिक्षक के बारें में बताएंगे जिन्होंने परिश्रम करके कई बच्चों का जीवन बदला है।
कोरबा (समाचार मित्र) जिले का एक ऐसा शिक्षक जिन्होंने धरातल पर ऐसा काम किया कि आज क्षेत्र में उनकी चर्चा होना लाजमी है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने नवाचार, डिजिटल तकनीक और गतिविधि आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों के लिए अंग्रेजी एवं गणित जैसे कठिन विषयों को सरल और रुचिकर बनाने का प्रयास किया है। एक ऐसा शिक्षक जो बच्चों की छुट्टी होने के बाद भी पढ़ाते है ताकि बच्चों का भविष्य बेहतर बन सकें।
छत्तीसगढ़ के दूरस्थ ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने वाले डॉ. मनोज प्रधान, प्रधान पाठक शासकीय प्राथमिक शाला खरवानी, विकासखंड करतला, जिला कोरबा (छत्तीसगढ़ ) में पदस्थ है जो आज शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने नवाचार, डिजिटल तकनीक और गतिविधि आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों के लिए अंग्रेजी एवं गणित जैसे कठिन विषयों को सरल और रुचिकर बनाने का प्रयास किया है।
डॉ. प्रधान स्कूल समय के बाद भी बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं संचालित करते हैं। वर्ष 2016 से वे लगातार नवोदय विद्यालय, एकलव्य विद्यालय एवं उत्कर्ष परीक्षा की तैयारी करा रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में अब तक 19 विद्यार्थियों का चयन हो चुका है। सत्र 2026 की नवोदय चयन परीक्षा में उनके विद्यार्थी चैतन्य कंवर ने कोरबा जिले में प्रथम स्थान प्राप्त कर ग्रामीण प्रतिभाओं की क्षमता का उदाहरण प्रस्तुत किया।
खेल-खेल में अंग्रेजी सीख रहे बच्चे !

बच्चों में अंग्रेजी के प्रति झिझक और भय को दूर करने के लिए डॉ. प्रधान ने फॉनिक्स, वर्ड एक्टिविटी, TLM, खेल एवं विभिन्न गतिविधियों को शिक्षण का माध्यम बनाया। प्रोजेक्टर एवं डिजिटल संसाधनों का उपयोग कर वे बच्चों में अंग्रेजी के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता और कम्युनिकेशन स्किल विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं।
उनका मानना है कि छोटे बच्चों के लिए अक्षरों को पहचानना, शब्दों को डिकोड करना और सही उच्चारण सीखना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में गतिविधि आधारित शिक्षा बच्चों को बिना दबाव के सीखने का अवसर देती है। लगातार अभ्यास और नवाचार के परिणामस्वरूप बच्चों के आत्मविश्वास में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला।
‘लीप फॉर वर्ड’ टीम से मिला मार्गदर्शन
अंग्रेजी शिक्षण को बेहतर बनाने में लीप फॉर वर्ड टीम के मार्गदर्शन को भी डॉ. प्रधान महत्वपूर्ण मानते हैं। टीम से मिले मार्गदर्शन के माध्यम से उन्होंने अंग्रेजी व्याकरण, फॉनिक साउंड और शब्द भंडार को गतिविधियों एवं खेल के माध्यम से बच्चों तक पहुंचाने का प्रयास किया।
खुद अंग्रेजी से संघर्ष किया, अब बच्चों को सिखा रहे !

डॉ. मनोज प्रधान का सफर भी संघर्ष से भरा रहा है। उनका जन्म ग्राम महंत, जिला जांजगीर-चांपा के एक सामान्य परिवार में हुआ। उन्होंने शासकीय विद्यालय से हिंदी माध्यम में पढ़ाई की और कक्षा सातवीं में पहली बार अंग्रेजी से परिचित हुए। शुरुआत में अंग्रेजी उनके लिए बेहद कठिन थी, लेकिन लगातार प्रयास और अभ्यास से उन्होंने इस विषय पर पकड़ बनाई।
यही संघर्ष आज उनके शिक्षण की ताकत बन गया है। वे अपने अनुभव के आधार पर बच्चों को यह संदेश देते हैं कि लगातार प्रयास और अभ्यास से कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।
शिक्षा के साथ लेखन और नवाचार में भी योगदान
डॉ. प्रधान ने नवंबर 2025 में ‘न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2020’ विषय पर पुस्तक लिखी तथा विभिन्न साझा संकलन पुस्तकों में भी लेखन किया। जनवरी 2026 में शिक्षा के क्षेत्र में उनके नवाचारों और ‘सामाजिक समरसता व आधुनिक शिक्षा पद्धति’ विषय पर किए गए कार्यों के लिए उन्हें नोएडा, नई दिल्ली से मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया गया।
ग्रामीण शिक्षा में बदलाव की मिसाल

आज खरवानी स्कूल के बच्चों के लिए अंग्रेजी सीखना पहले की तुलना में आसान और आनंददायक हो गया है। भयमुक्त वातावरण, डिजिटल तकनीक और गतिविधि आधारित शिक्षण ने बच्चों में सीखने की रुचि और आत्मविश्वास बढ़ाया है।
डॉ. मनोज प्रधान को छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण सम्मान के लिए बिलासपुर संभाग से कोरबा जिले के उत्कृष्ट शिक्षकों के रूप में पुरस्कृत करने हेतु चयन किया गया है।

डॉ. मनोज प्रधान का प्रयास यह साबित करता है कि संसाधनों की कमी प्रतिभा और शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती, यदि शिक्षक में कुछ नया करने का जुनून और बच्चों को आगे बढ़ाने का संकल्प हो।
ग्रामीण अंचल के बच्चों को नवोदय, एकलव्य और उत्कर्ष जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना तथा उन्हें आधुनिक शिक्षा से जोड़ना निश्चित रूप से उनके शिक्षकीय समर्पण की मिसाल है। वे कोरबा जिले के शिक्षकों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण हैं।


