कोरबा/करतला (समाचार मित्र) गांवों में आज भी कई ऐसी पारंपरिक व्यवस्थाएं देखने को मिल जाती हैं, जो आधुनिक तकनीक के साथ मिलकर लोगों की सुविधा बढ़ा रही हैं। ऐसा ही एक अनोखा दृश्य गांव में देखने को मिला, जहां एक हैंडपंप सीधे कुएं के ऊपर स्थापित किया गया है। यह व्यवस्था न केवल आकर्षण का केंद्र है, बल्कि जल संरक्षण और सुविधाजनक पेयजल उपलब्ध कराने का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।
करोड़ों रुपए के बड़े बड़े टंकी हुए फैल ?

ज्यादातर ग्रामों में नल जल योजना के नाम पर करोड़ों रुपए का पानी टंकी निर्माण कराया है जिसपर सरकार ने करोड़ों रुपए फुंक दिए परंतु पानी की एक बूंद भी ग्रामीणों को नसीब नहीं हो रही है ऐसे में क्षेत्र में मौजूद ये कुएं ग्रामीण अंचल में बड़े साधारण तरीके से मोहल्ले में पानी की किल्लत को दूर करने तरीका सिखा रहा है।
पुराने समय में ग्रामीणों को कुएं से पानी निकालने के लिए रस्सी और बाल्टी का सहारा लेना पड़ता था। इसमें समय और मेहनत दोनों अधिक लगते थे तथा बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह कार्य कई बार कठिन भी हो जाता था। वहीं आज उसी कुएं पर लगाए गए हैंडपंप ने पानी निकालने की प्रक्रिया को काफी सरल और सुरक्षित बना दिया है।
इस व्यवस्था के प्रमुख लाभ
कुएं का पानी बिना बाल्टी-रस्सी के आसानी से प्राप्त हो जाता है।
महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को कम मेहनत करनी पड़ती है।
कुएं में गिरने जैसी दुर्घटनाओं की आशंका कम हो जाती है।
यदि बिजली उपलब्ध न हो, तब भी पानी निकालना संभव रहता है।
कम लागत में वर्षों तक उपयोगी रहने वाली ग्रामीण तकनीक का अच्छा उदाहरण है।
यह दृश्य है करतला जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत बाड़मार के आश्रित ग्राम टीमनभौना से जो बताता है कि पुरानी जल संरचनाओं को समाप्त करने के बजाय यदि उन्हें आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए, तो वे आज भी ग्रामीण जीवन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती हैं। ऐसे नवाचार न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा देते हैं, बल्कि हमारी पारंपरिक धरोहर को भी जीवित रखते हैं।
संदेश:
“पुराने कुएं हमारी विरासत हैं और आधुनिक हैंडपंप हमारी सुविधा। जब दोनों का मेल होता है, तो गांव आत्मनिर्भर जल व्यवस्था की ओर एक मजबूत कदम बढ़ाता है।”
https://youtu.be/7cnfexHRhzs?si=pzuYLco0I_eall4t

