रायपुर/कोरबा (समाचार मित्र) छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समय शिक्षक फेडरेशन के आह्वान पर राज्यभर के शिक्षक 15 जुलाई को एक दिवसीय हड़ताल पर रहें। फेडरेशन ने सभी शिक्षकों से अपील की थी कि वे हड़ताल के समर्थन में विद्यालयों एवं ग़ैर शैक्षणिक कार्यों में उपस्थित न हों और शासन का ध्यान अपनी लंबित मांगों की ओर आकर्षित करें। उक्त अपील का असर स्कूलों में देखने को मिला जहां कई स्कूलों में शिक्षक व्यवस्था नहीं होने से दिनभर स्कूल रहे। वहीं माध्यमिक शाला के प्रधानपाठकों ने भी इस हड़ताल का समर्थन किया जिससे कई स्कूलों में ताला जड़ा हुआ था।

प्रधानपाठकों के अचानक हड़ताल समर्थन से स्कूल में व्यवस्था चरमरा गई और कई स्कूल के कपाट तक नहीं खुले जिससे पढ़ाई से लेकर मध्यान्ह भोजन जैसी शासन की कई महत्वपूर्ण योजनाएं ठप पड़ गई। कई स्कूलों में बच्चों को एक क्लास तक पढ़ाया नहीं गया केवल नाम मात्र के लिए स्कूल खोला गया था जिसमें दूसरे स्कूल के शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई थी। वही कुछ स्कूलों में मानदेय शिक्षकों ने जिम्मेदारी संभाली।

फेडरेशन के कोरबा जिलाध्यक्ष विनोद सांडे का कहना है कि कई वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण शिक्षकों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा इसके जिम्मेदार खुद राज्य सरकार है। संगठन ने शासन से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। एक दिवसीय हड़ताल के माध्यम से शिक्षक अपनी मांगों को शासन तक पहुंचा रही है यदि शिक्षकों की मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की और अग्रसर होना पड़ेगा। राज्यभर के शिक्षकों ने रायपुर स्थित विधानसभा के पास जमकर नारेबाजी की और शासन को शिक्षकों को होने वाली समस्याओं के प्रति ध्यानाकर्षण कराया।
शिक्षकों की प्रमुख 7 मांगें क्या है ?
वेतन विसंगति दूर की जाए।
पदोन्नति में वरिष्ठता का पालन किया जाए।
सेवा सुरक्षा एवं विभागीय परीक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान हो।
प्रथम नियुक्ति से सेवा गणना की जाए।
एकल शिक्षकिय शालाओं में पर्याप्त शिक्षक व्यवस्था की जाए।
VSK App की तकनीकी समस्याओं का समाधान किया जाए।
युक्तिकरण के तहत वित्तीय प्रभार संबंधी समस्याओं का निराकरण किया जाए।
हड़ताल के कारण प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य प्रभावित हुआ है। अब सभी की नजर शासन और शिक्षक संगठनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर रहेगी कि इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है। बहरहाल इन हड़तालों से बच्चों के शिक्षा और शासन की। कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर सीधा असर जरूर पड़ रहा है।

