कोरबा (समाचार मित्र) मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में पार्किंग व्यवस्था का ठेका बदलने के बावजूद वाहन सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पार्किंग व्यवस्था में बदलाव के बाद सुरक्षा बेहतर होने के दावे किए गए थे, लेकिन हाल ही में दोपहिया वाहन चोरी की घटनाओं ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, अस्पताल परिसर में पार्किंग का ठेका बदलने के बाद नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत पार्किंग क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने और मुख्य प्रवेश द्वार पर चेक प्वाइंट तैयार करने की बात कही गई थी। हालांकि, पार्किंग में खड़े वाहनों की प्रभावी निगरानी, सीसीटीवी कैमरों की स्थिति और वाहनों की आवाजाही का व्यवस्थित रिकॉर्ड अभी भी महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
दो लोगों की बाइक चोरी होने की जानकारी
बताया गया है कि एक वाहन चोरी की घटना में परिजन के भर्ती होने पर अस्पताल पहुंचे रोहित शर्मा की दोपहिया वाहन पार्किंग से गायब हो गई। रोहित के मुताबिक उन्होंने वाहन पार्किंग में खड़ा कर पर्ची ली थी, लेकिन अगले दिन वाहन वहां नहीं मिला। पूछताछ के दौरान पार्किंग कर्मचारियों से भी उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिल सकी।
इसी तरह एक अन्य व्यक्ति की दोपहिया वाहन भी अस्पताल परिसर से चोरी होने की जानकारी सामने आई है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से अस्पताल आने वाले मरीजों, परिजनों और कर्मचारियों में अपने वाहनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
ठेका बदला, निगरानी व्यवस्था पर सवाल बरकरार
नए पार्किंग ठेके की शर्तों में वाहन चोरी या नुकसान की स्थिति में बीमा राशि और उसके अंतर का भुगतान ठेका कंपनी द्वारा किए जाने का प्रावधान होने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद बड़ा सवाल यह है कि पार्किंग क्षेत्र में वाहनों की निगरानी कितनी प्रभावी है।
अस्पताल प्रबंधन की ओर से पार्किंग क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने, सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था करने और प्रवेश-निकास पर निगरानी की बात कही गई है। अब जरूरत इस बात की है कि इन व्यवस्थाओं को जमीन पर प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि अस्पताल आने वाले लोगों को अपने वाहनों की सुरक्षा को लेकर परेशानी न हो।
सवाल यह है कि पार्किंग का ठेका बदलने के बाद आखिर निगरानी व्यवस्था कब बदलेगी और अस्पताल परिसर में वाहन चोरी पर प्रभावी रोक कब लगेगी?


