जाँजगीर-चांपा (समाचार मित्र) सभा के सदस्य, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं छत्तीसगढ़ के प्रथम बैरिस्टर के रूप में स्मरण किए जाने वाले बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल जी की पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति समारोह में विधि छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने रखा। छात्रों ने छत्तीसगढ़ के स्कूलों में ‘कानूनी साक्षरता (Legal Literacy)’ को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की मांग उठाई।
कार्यक्रम में विधि छात्र केशव जटवार के नेतृत्व में तैयार सामूहिक प्रस्ताव एवं मांग-पत्र का वाचन किया गया। इसमें कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को आयु के अनुरूप बुनियादी कानूनी जानकारी देने की मांग की गई है।
सांसद, विधायक, कलेक्टर और एसपी के समक्ष रखा प्रस्ताव
विधि छात्रों द्वारा तैयार प्रस्ताव को कार्यक्रम में उपस्थित सांसद, विधायक, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) सहित जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष रखा गया। आयोजकों के अनुसार, मंच से प्रस्ताव को प्रासंगिक बताते हुए समर्थन व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने भी हस्ताक्षर कर इस पहल के प्रति अपना समर्थन दर्ज कराया। इससे विधि छात्रों की पहल को व्यापक जनसमर्थन मिलने का संदेश सामने आया।
‘हर बच्चे को वकील नहीं, जागरूक नागरिक बनाना उद्देश्य’
मुख्य प्रस्तावक विधि छात्र केशव जटवार ने कहा कि कानूनी साक्षरता का उद्देश्य हर विद्यार्थी को वकील बनाना नहीं, बल्कि उसे अपने अधिकारों, कर्तव्यों और सामान्य कानूनी प्रक्रियाओं की बुनियादी समझ देना है।
उन्होंने कहा कि बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल जी ने देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी पुण्यतिथि पर ऐसी पहल करना उनके विचारों और जनहित की भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास है। यदि बच्चों को स्कूल स्तर से ही कानून की बुनियादी जानकारी मिलेगी, तो वे अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
क्या हैं विधि छात्रों की 5 प्रमुख मांगें?
1. कक्षा 6वीं से 12वीं तक Legal Literacy
कानूनी साक्षरता को स्वतंत्र विषय अथवा Social Science, Civics या Life Skills के अंतर्गत व्यवस्थित मॉड्यूल के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
2. व्यवहारिक कानूनी जानकारी
विद्यार्थियों को आयु के अनुरूप संविधान, मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य, बाल एवं महिला सुरक्षा, POCSO कानून की बुनियादी जानकारी, FIR एवं शिकायत की सामान्य प्रक्रिया, साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता अधिकार, RTI, Legal Aid और Lok Adalat जैसे विषयों से परिचित कराया जाए।
3. सरल भाषा में हो कानूनी शिक्षा
कानूनी विषयों को कठिन शब्दावली के बजाय सरल हिंदी तथा आवश्यकता अनुसार छत्तीसगढ़ी/स्थानीय भाषा में वास्तविक जीवन के उदाहरणों और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाया जाए।
4. विधि विशेषज्ञों की भागीदारी
SCERT के माध्यम से विधि विशेषज्ञों, अधिवक्ताओं, विधि महाविद्यालयों एवं विधिक सेवा संस्थाओं के सहयोग से पाठ्यक्रम और शिक्षक प्रशिक्षण सामग्री तैयार की जाए।
5. पायलट प्रोजेक्ट के बाद पूरे प्रदेश में विस्तार
प्रारंभिक चरण में चयनित शासकीय एवं निजी विद्यालयों में Pilot Legal Literacy Programme शुरू किया जाए। इसके परिणामों के आधार पर इसे पूरे छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री, NCERT और शिक्षा मंत्रालय को भेजा जाएगा ज्ञापन
विधि छात्रों के अनुसार, कार्यक्रम में मिले जनसमर्थन के बाद हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन की प्रतियां छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, NCERT, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय तथा राज्य शिक्षा विभाग/शिक्षा भवन, रायपुर को भेजी जा रही हैं।
मांग-पत्र के माध्यम से विद्यालयीन शिक्षा में कानूनी साक्षरता को व्यवस्थित रूप से शामिल करने के संबंध में नीतिगत निर्णय और आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया जाएगा।
विधि छात्रों ने संभाली अभियान की जिम्मेदारी
इस अभियान के मुख्य प्रस्तावक केशव जटवार हैं। उनके साथ गिरधारी चंद्रा, राहुल यादव, इंद्रजीत कुर्रे, मेघा, गार्गी काहरा और लक्ष्मी नारायण आदित्य सहित अन्य सहयोगी विधि छात्र जुड़े हैं।
कार्यक्रम में विक्रम बघेल, हेमंत कुमार कैवर्त, करन धीवर, रवींद्र बंजारे, अक्षय रात्रे, भावना देवांगन, प्रियंका कश्यप सहित बड़ी संख्या में विधि के छात्र उपस्थित रहे। छात्रों ने कानूनी साक्षरता को स्कूली शिक्षा से जोड़ने की इस पहल में सक्रिय सहभागिता निभाई।
विधि छात्रों का कहना है कि आज के दौर में संविधान, अधिकार, कर्तव्य, साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता अधिकार और कानूनी सहायता जैसी बुनियादी जानकारी केवल कानून पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। स्कूल स्तर से कानूनी जागरूकता की शुरुआत होने पर विद्यार्थी भविष्य में अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझने वाले जागरूक नागरिक बन सकेंगे।


