रायपुर (समाचार मित्र) छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने वाले कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ने वाली है। सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने वाले कर्मचारियों पर शिकंजा कसना शुरू किया है।
फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र पर सख्त कार्रवाई:
फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट (Disability Certificate) के आधार पर शासकीय सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी जांच की तैयारी की गई है.
186 प्रकरणों की होगी जांच:
राज्य में दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे ऐसे 186 संदिग्ध प्रकरणों की जांच राज्य या संभागीय मेडिकल बोर्ड के जरिए कराई जाएगी.
मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश होना अनिवार्य:
संबंधित कर्मचारियों को निर्धारित समयान्तराल में मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होकर भौतिक परीक्षण कराना होगा। जांच में लापरवाही या फर्जीवाड़ा पाए जाने पर नौकरी जा सकती है.
मंत्रियों की संयुक्त बैठक में फैसला:
मंत्रालय (महानदी भवन), अटल नगर में समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की संयुक्त बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया.
बैठक में लिए गए अन्य महत्वपूर्ण फैसले
प्रमाण-पत्र और UDID कार्ड की प्रक्रिया होगी सुगम:
दिव्यांगजनों के दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और यूडीआईडी (UDID) कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी होने पर निजी क्षेत्र के डॉक्टरों की सेवाएं भी ली जाएंगी.
उभयलिंगी (Transgender) समुदाय के लिए कल्याणकारी कदम:
राज्य के सरकारी अस्पतालों में पृथक ‘ट्रांसजेंडर क्लिनिक/वार्ड’ बनाने तथा सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी (SRS) के लिए सहायता अनुदान की दरों में संशोधन पर विचार किया गया.
नशामुक्ति केंद्रों का सुदृढ़ीकरण:
मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम, 2017 के तहत नशामुक्ति केंद्रों के पंजीयन, बेहतर संचालन और मरीजों को दवाओं की निर्बाध आपूर्ति के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए गए.
नियमित स्वास्थ्य परीक्षण:
शासकीय एवं अनुदान प्राप्त संस्थाओं में रह रहे दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों, भिक्षुकों और नशा पीड़ितों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी.

