कोरबा (समाचार मित्र) प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत जनपद पंचायत कोरबा क्षेत्र में कथित अवैध वसूली और आवास निर्माण में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। इस संबंध में नंदकुमार कंवर, सभापति, महिला एवं बाल विकास, जनपद पंचायत कोरबा ने जिला पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सभापति नंदकुमार कंवर द्वारा भेजे गए पत्र में जनपद पंचायत कोरबा में प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभारी ब्लॉक समन्वयक रहे अभिषेक चौरसिया पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पत्र के अनुसार, ब्लॉक समन्वयक का पद रिक्त होने पर अभिषेक चौरसिया को आवास योजना के प्रभारी ब्लॉक समन्वयक का प्रभार सौंपा गया था। इसी दौरान आवास मित्रों एवं रोजगार सहायकों के माध्यम से हितग्राहियों से कथित रूप से अवैध राशि वसूलने का आरोप लगाया गया है।

पत्र में ग्राम पंचायत श्यांग से जुड़े एक वीडियो का भी उल्लेख किया गया है। इसमें रोजगार सहायक द्वारा कथित रूप से राशि की मांग किए जाने की बात सामने आने का दावा किया गया है। पत्र के मुताबिक, वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर जिला एवं जनपद प्रशासन द्वारा जांच कराई गई थी।
सभापति ने पत्र में आरोप लगाया है कि जांच के दौरान मामले में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की गंभीरता से जांच नहीं की गई। साथ ही रोजगार सहायक पर कार्रवाई के बजाय मामले को सीमित स्तर पर निपटाने का आरोप भी लगाया गया है।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि अभिषेक चौरसिया के कार्यकाल के दौरान गरीब एवं कमजोर वर्ग के आवास हितग्राहियों के आवासों में कथित अनियमितताएं हुईं। कुछ आवासों का फर्जी जियोटैग कर हितग्राहियों के खातों से राशि निकालकर आवास को पूर्ण दर्शाए जाने का आरोप लगाया गया है, जबकि कई आवासों के वास्तविक रूप से अधूरे होने की बात कही गई है। ग्राम पंचायत लेमरू में आवास निर्माण से संबंधित कथित वित्तीय गड़बड़ी का भी पत्र में उल्लेख किया गया है।
इन क्षेत्रों के आवासों की भौतिक जांच की मांग
सभापति नंदकुमार कंवर ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मांग की है कि कथित अवैध वसूली से संबंधित वीडियो की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके साथ ही श्यांग, लेमरू, लबेद, गिरारी, अमलडीहा, चिर्रा और निकिया सहित संबंधित ग्रामों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित एवं निर्माणाधीन आवासों की वास्तविक भौतिक स्थिति की जांच करने की मांग की गई है।
पत्र में दोषी पाए जाने वाले संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई करने तथा मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।

