नई दिल्ली (समाचार मित्र) सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर बढ़ते हादसों, अवैध अतिक्रमण, गैरकानूनी पार्किंग और बुनियादी सुरक्षा ढांचे की कमी पर सख्त रुख अपनाते हुए कई अहम अंतरिम निर्देश जारी किए हैं।
अदालत ने कहा कि यात्री की सुरक्षा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीने के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे प्रशासनिक लापरवाही और ढांचागत कमियों के कारण खतरे का गलियारा नहीं बन सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे में आने वाले सभी अनधिकृत अतिक्रमण, जैसे ढाबे, भोजनालय और अन्य व्यावसायिक ढांचे, हटाने का आदेश दिया है। जिला मजिस्ट्रेटों को 60 दिनों के भीतर ऐसे सभी अवैध निर्माण हटाने को कहा गया है।
भविष्य में नहीं जारी की जाएगी NOC
साथ ही, भविष्य में बिना एनएचएआई या लोक निर्माण विभाग की मंजूरी के कोई लाइसेंस, ट्रेड अप्रूवल या एनओसी जारी नहीं की जाएगी। मौजूदा लाइसेंसों की 30 दिनों में समीक्षा होगी। यह मामला राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में नवंबर 2023 में हुए हादसों के बाद सामने आया, जिनमें 34 लोगों की मौत हुई थी। अदालत ने कहा कि जीवन का अधिकार सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी राज्य पर डालता है।
45 दिन में ब्लैकस्पॉट सूची जारी होगी
30 दिनों में समीक्षा होगी मौजूदा लाइसेंसों की
142 अनुच्छेद के तहत यह आदेश पारित किया 13 अप्रैल को
एंबुलेंस, क्रेन और आधुनिक सिस्टम
एनएचएआई को 60 दिनों के भीतर हर 75 किमी पर एबुलेंस और रिकवरी क्रेन तैनात करने का आदेश दिया गया है। वे-साइड सुविधाओं में विश्राम, भोजन, शौचालय, सुरक्षित पार्किंग और संकेतक अनिवार्य होंगे। सभी 4 और 6 लेन हाईवे पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा।
ब्लैकस्पॉट की पहचान जरूरी
निर्देश दिए गए है कि एनएचएआई और सड़क परिवहन मंत्रालय को 45 दिनों में दुर्घटना संभावित ब्लैकस्पॉट की सूची जारी करनी होगी। यहां लाइटिंग, कैमरे और चेतावनी संकेत लगाए जाएंगे। केंद्र को अंतरराज्यीय समन्वय समिति पर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए है।

