कोरबा/बड़मार (समाचार मित्र) स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण को लेकर बड़मार पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत द्वारा 15वें वित्त मद से करीब 2.50 लाख रुपए की राशि आहरित की गई, लेकिन संबंधित हितग्राहियों को शौचालय निर्माण के लिए कथित तौर पर एक रुपए भी प्रदान नहीं किया गया।
2 योजनाओं से सरकार को लगाने चले है चुना, हितग्राहियों को किया गुमराह, अबतक एक रुपए भी नहीं मिला राशि !
सत्र 2024-25 में 15वें वित्त से शौचालय निर्माण हेतु 2.50 लाख रुपए सचिव रामदयाल पटेल एवं वर्तमान सरपंच ने आहरण किया परंतु जिन हितग्राहियों के लिए यह आहरण हुआ था उन्हें एक रुपए भी पंचायत ने नहीं दिया हितग्राहियों ने स्वयं के खर्च से शौचालय निर्माण करवा दिया परंतु उन्हें पंचायत ने न तो सीमेंट दिया और न ही एक ईंट वही निर्माण के लिए राशि आहरित कर एक ही कार्य के लिए दूसरी योजना से भी राशि लेने का प्रयास किया जा रहा है। हितग्राहियों को गुमराह कर जिला स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के तहत राशि दिलाने के लिए आवेदन भी प्रस्तुत कर दिया गया। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो एक ही शौचालय निर्माण कार्य के लिए अलग-अलग योजनाओं से राशि प्राप्त करने का प्रयास किए जाने की आशंका है।
हितग्राही रामनाथ राठिया पिता नान्ही सिंह के शिक्षक पुत्र का फोटो अपलोड किया परंतु एक रुपए भी नहीं दिया।

ग्राम पंचायत बड़मार के तत्कालीन सचिव रामदयाल पटेल एवं सरपंच ने संयुक्त हस्ताक्षर से 2.5 रुपए 15वें वित्त आयोग से आहरण किया परंतु एक रुपए भी किसी हितग्राहियों को नहीं दिया। इसी तरह गांव के कई हितग्राहियों ने शौचालय निर्माण कराया परंतु 15वें वित्त से किसी को कोई राशि प्रदान नहीं की गई बल्कि उन्हें स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के तहत राशि लेने आवेदन जनपद में प्रस्तुत कर दिया गया।
जनपद सीईओ से लिखित शिकायत के बाद भी कार्यवाही नहीं !
बताया जा रहा है कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत भी की गई, लेकिन शिकायत के बाद भी अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में दोहरे आहरण से सरकार को चुना लगाया जा रहा है। आखिर पंचायत द्वारा 15वें वित्त से आहरित 2.50 लाख रुपए की राशि कहां और किस मद में खर्च की गई इसकी जांच अति आवश्यक है। हितग्राहियों को राशि क्यों नहीं दी गई ये सवाल आज भी ग्रामीण पूछ रहे है। यदि उसी कार्य के लिए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से दोबारा राशि लेने का प्रयास हुआ है, तो इसके पीछे जिम्मेदार कौन है ?
मामले की निष्पक्ष जांच कर दस्तावेजों, भुगतान अभिलेखों और शौचालय निर्माण की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाना आवश्यक है। यदि जांच में अनियमितता या दोहरी राशि आहरण का प्रयास प्रमाणित होता है, तो जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

