नई दिल्ली (समाचार मित्र) सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले आकर्षक या एडल्ट कंटेंट से जुड़े विज्ञापनों पर बिना जांचे क्लिक करना भारी पड़ सकता है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की नेशनल साइबरक्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (NCTAU) ने साइबर ठगी के एक खतरनाक तरीके को लेकर एडवाइजरी जारी की है।
एडवाइजरी के अनुसार, साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एडल्ट कंटेंट से जुड़े आकर्षक विज्ञापन दिखाकर लोगों को फर्जी वेबसाइटों तक पहुंचा रहे हैं। यहां यूजर को ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। चिंता की बात यह है कि ये ऐप आधिकारिक ऐप स्टोर के बजाय बाहरी वेबसाइट से APK फाइल के रूप में डाउनलोड कराए जाते हैं।
विज्ञापन पर क्लिक करते ही शुरू हो सकता है साइबर ठगी का खेल
साइबर अपराधी पहले ऐसा विज्ञापन दिखाते हैं, जो यूजर का ध्यान आसानी से खींच सके। विज्ञापन पर क्लिक करते ही यूजर को एक संदिग्ध वेबसाइट पर भेज दिया जाता है, जहां ऐप इंस्टॉल करने का विकल्प मिलता है।
ये ऐप आमतौर पर Google Play Store जैसे आधिकारिक प्लेटफॉर्म से डाउनलोड नहीं होते, बल्कि APK फाइल के जरिए फोन में इंस्टॉल कराए जाते हैं। इस प्रक्रिया को साइडलोडिंग कहा जाता है।
इन 7 ऐप्स से सावधान रहने की चेतावनी
सरकारी चेतावनी के मुताबिक इस तरह की साइबर ठगी में निम्न नाम वाले ऐप्स का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है:
Night Play, Reloop, Kyss, Riva, Vima, Nexo और Vixa
इन ऐप्स को एडल्ट कंटेंट उपलब्ध कराने वाले ऐप के रूप में पेश किया जा सकता है। इंस्टॉल होने के बाद ये फोन में Accessibility Permission मांग सकते हैं।
Accessibility Permission देना पड़ सकता है भारी
अगर यूजर बिना जांचे किसी संदिग्ध ऐप को Accessibility Permission दे देता है, तो ऐप को फोन के कई महत्वपूर्ण फीचर्स तक पहुंच मिल सकती है। इसके बाद फोन में मौजूद संवेदनशील जानकारी के गलत इस्तेमाल का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे संदिग्ध ऐप्स के जरिए मैसेज, OTP और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की कोशिश की जा सकती है। इसके बाद साइबर अपराधी बैंक खाते से पैसे निकालने या दूसरी ऑनलाइन ठगी को अंजाम देने का प्रयास कर सकते हैं।
फोन में चुपके से VPN इंस्टॉल होने का भी खतरा
I4C के मुताबिक, कुछ खतरनाक ऐप यूजर की जानकारी के बिना फोन में VPN जैसी व्यवस्था भी इंस्टॉल कर सकते हैं। इसके जरिए इंटरनेट ट्रैफिक को दूसरे रास्ते से भेजा जा सकता है। ऐसी स्थिति में पीड़ित के फोन या इंटरनेट कनेक्शन का दुरुपयोग संदिग्ध अथवा गैरकानूनी ऑनलाइन गतिविधियों में किए जाने का खतरा रहता है।
अनइंस्टॉल करना भी हो सकता है मुश्किल
इन ऐप्स की एक और खतरनाक बात यह है कि कुछ संदिग्ध ऐप खुद को फोन से हटाए जाने से रोकने की कोशिश कर सकते हैं। यूजर जब ऐप को अनइंस्टॉल करने जाता है तो फोन की सेटिंग्स में परेशानी पैदा हो सकती है, जिससे सामान्य तरीके से ऐप हटाना मुश्किल हो सकता है।
साइबर ठगी से बचने के लिए रखें ये सावधानियां
– Google Play Store या Apple App Store जैसे आधिकारिक प्लेटफॉर्म के बाहर से ऐप डाउनलोड करने से बचें।
– सोशल मीडिया पर दिखने वाले संदिग्ध या अश्लील विज्ञापनों के लिंक पर क्लिक न करें।
– किसी अनजान ऐप को Accessibility Permission देने से पहले उसकी विश्वसनीयता जरूर जांचें।
– गलती से संदिग्ध ऐप इंस्टॉल हो जाए तो इंटरनेट कनेक्शन बंद कर दें और तकनीकी विशेषज्ञ की मदद लें।
– बैंक खाते, OTP या SMS से जुड़ी संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तत्काल अपने बैंक से संपर्क करें।
– साइबर ठगी का शिकार होने पर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर जल्द से जल्द शिकायत दर्ज कराएं।
एक गलत क्लिक पड़ सकता है भारी
सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला हर विज्ञापन भरोसेमंद नहीं होता। खासकर ऐसे विज्ञापनों से सावधान रहना जरूरी है, जो किसी बाहरी वेबसाइट पर ले जाकर APK फाइल डाउनलोड करने को कहते हैं। किसी भी ऐप को फोन में इंस्टॉल करने से पहले उसके स्रोत, डेवलपर और मांगी जा रही परमिशन की जांच करना साइबर ठगी से बचने का सबसे आसान तरीका है।

