कोरबा (समाचार मित्र) कोरबा मुख्यालय से 50 KM दूर वनांचल क्षेत्रों में शासकीय योजनाओं के कार्यान्वयन में बड़े पैमाने पर बंदरबांट की शिकायतें सामने आई है। कोरबा जनपद पंचायत में आने वाले एक ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। उक्त ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना एवं मनरेगा के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामला कोरबा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत लेमरू का है। यहां हितग्राहियों का आरोप है कि पूर्व सचिव रामायण कंवर, वर्तमान पंचायत सचिव खगेश्वर पाण्डेय और रोजगार सहायक कलपनाथ कुजूर द्वारा गुमराह कर आवास निर्माण के नाम पर उनका राशि लेकर लंबे समय से मकानों का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई हितग्राहियों के मकान पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से अधूरे पड़े हुए हैं। निर्माण कार्य रुक जाने के कारण पात्र परिवारों को आज भी पक्के मकान का लाभ नहीं मिल सका है। इससे उन्हें बरसात और अन्य मौसमों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आरोप यह भी है कि मनरेगा योजना के तहत जिन हितग्राहियों को मजदूरी का भुगतान किया जाना चाहिए, उनकी जगह अन्य व्यक्तियों के नाम पर भुगतान किया जा रहा है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि इस पूरे मामले में जनपद स्तर के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिसके कारण शिकायतों के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
(1) हितग्राही राजेंद्र विश्वकर्मा : 3 वर्षों से अधूरा है आवास, सचिव ले गया पैसा ।

ग्राम पंचायत लेमरू में निवासरत हितग्राही राजेंद्र विश्वकर्मा एवं उनकी पत्नी ने बताया कि पंचायत सचिव आवास का पैसा स्वयं बनायेंगे कहकर कोरबा में ही ले लेते है, 2023 में आवास स्वीकृति हुआ था 3 वर्षों से आज भी अधूरा है आवास उन्हें 2 किस्त की राशि प्राप्त हुई है।
(2) हितग्राही सुखराम : 3 वर्षों से अधूरा, सचिव को दे चुके है पैसा !

आवास योजना के हितग्राही सुखराम का आरोप है कि उनके द्वारा 2 किस्त का पैसा सचिव खगेश्वर पाण्डेय को दिया जा चुका है उसके बाद भी लेंटर लेवल तक घर नहीं बना है। हालांकि यहां आवास मित्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते है कि बिना फ्लिंट लेवल पूर्ण किए हितग्राही का दूसरी किस्त जारी कैसे हुआ ?
जनपद के अधिकारी भी भ्रष्टाचार में शामिल !
रोजगार सहायक कलपनाथ कुजूर ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर ही हितग्राहियों से पैसा लेकर जनपद के कुछ अधिकारियों को देते थे उनका कहना है कि हितग्राहियों द्वारा आवास नहीं बनाया जाता है इसलिए उनसे पैसा लेकर जनपद के अधिकारी बनवा रहे है जिससे पूरा खेल जनपद स्तर के आला अधिकारियों के संरक्षण में चलना प्रतीत होता है। उक्त मामले में प्रमुखता से जनपद पंचायत कोरबा के कर्मचारी योगेश कुमार का नाम सामने आया है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा अधूरे पड़े सभी आवासों का निर्माण शीघ्र पूर्ण कराया जाए, ताकि पात्र हितग्राहियों को योजना का वास्तविक लाभ मिल सके।
(नोट: यह समाचार स्थानीय स्तर पर लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अथवा संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

