बिलासपुर (समाचार मित्र) कानफोडू डीजे की आवाज से अब प्रदेशवासियों को मुक्ति मिलेगी। राज्य सरकार ने कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 2026 में जरुरी और सख्त नियम लागू कर दिया है। बिना अनुमति डीजे नहीं बजा पाएंगे और ना ही किराए पर ले जा सकेंगे। ऐसा करते पाए जाने पर डीजे संचालक को एक साल की सजा और जुर्माना पटाना होगा। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट की सख्ती का असर अब जाकर दिखाई देने लगा है।
छत्तीसगढ़ में अब बड़े-बड़े लाउडस्पीकर, डीजे बजाकर शोर-शराबा करने और लोगों की जान को जोखिम में डालने वालों की खैर नहीं। राज्य सरकार ने इसके लिए कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 2026 बनाया है।
नियमों व प्रावधान के मद्देनजर अब ध्वनि विस्तारक यंत्र बजाने से पहले जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस कमिश्नर या सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति बजाने पर सख्ती बरती जाएगी। एक साल की सजा और उपकरण जब्त कर नीलाम कर दिया जाएगा। गृह एवं पुलिस विभाग द्वारा इस विधेयक को लागू करने से पहले जनता, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से 5 अक्टूबर 2026 तक दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गई है। इसके बाद इसे प्रभावी ढंग से प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।
पढ़िए क्या लिखा है, कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 2026 के प्रारुप में?
अधिनियम के प्रारूप में साइलेंट जोन को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि अस्पतालों, नर्सिंग होम, शैक्षणिक संस्थानों, छात्रावासों, न्यायालयों, केंद्र या राज्य सरकार तथा स्थानीय निकायों के कार्यालयों की 100 मीटर की परिधि को साइलेंट जोन घोषित किया गया है। इसके अलावा जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त, लोक आदेश द्वारा अन्य क्षेत्रों को भी इस श्रेणी में अधिसूचित कर सकते हैं। विधेयक के अनुसार सुबह 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक का समय ‘दिन का समय तथा रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक का समय ‘रात्रि का समय’ माना गया है।
नियमों का उल्लंघन करने पर ये मिलेगी सजा
पहली बार नियम तोड़ने पर कारावास (जो कुछ महीनों तक हो सकती है) या कम से कम 50 हजार रुपये का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। यदि यह अपराध किसी शांत क्षेत्र में किया जाता है, तो सजा एक साल तक और न्यूनतम जुर्माना 75 हजार रुपये तक हो सकता है। दोबारा दोषी पाए जाने पर तीन महीने से एक साल तक की सजा और न्यूनतम 1 लाख रुपये का जुर्माना होगा। साइलेंट जोन में अपराध दोहराने पर सजा 6 माह से 2 वर्ष और न्यूनतम 1 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना तय किया गया है। इसके साथ ही, आपूर्तिकर्ता का पंजीयन स्थायी रूप से निरस्त कर दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में पीआईएल पर हो रही सुनवाई
बता दें, छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। हाई कोर्ट ने स्वत:संज्ञान वाली जनहित याचिका और अन्य पीआईएल को एकसाथ मर्ज कर सुनवाई प्रारंभ की थी। राज्य सरकार को इस पर कड़े नियम बनाने व सख्ती के साथ लागू करने का निर्देश हाई कोर्ट ने दिया था।
हाई कोर्ट के निर्देश पर डीजीपी ने शपथ पत्र में डिवीजन बेंच को जानकारी दी थी कि इसके लिए जिले के एसपी को प्रभावी नियंत्रण करने और इस पर सख्ती के साथ रोक लगाने का निर्देश दिया है। राज्य शासन ने प्रभावी कानून बनाने की जानकारी कोर्ट को दी थी।
DJ की 110 से 120 डेसिबल तक की तेज आवाज शरीर और स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक होता है
मानव स्वास्थ्य के लिए सामान्यतः 65 से 70 डेसिबल से अधिक की आवाज हानिकारक मानी जाती है। डीजे का कानफोडू शोर हमारे शरीर पर कई तरह से बुरा असर डालता है:
हार्ट अटैक और ब्लड प्रेशरः तेज आवाज से शरीर का स्ट्रेस हार्मोन (तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन) सक्रिय हो जाता है, जिससे अचानक रक्तचाप (Blood Pressure) और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। इससे हृदय रोगियों या कमजोर दिल वाले लोगों को कार्डियाक अरेस्ट या हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
सुनने की शक्ति पर असर: 80 से 100 डेसिबल या
उससे अधिक के लगातार शोर से कान के पर्दे फट सकते हैं और अंदरूनी नसें डैमेज हो सकती हैं, जिन व्यक्ति स्थायी रूप से बहरापन का शिकार हो सकता है।
मानसिक स्वास्थ्यः अत्यधिक शोर के कारण गंभीर
सिरदर्द, चक्कर आना, मानसिक तनाव, अत्यधिक चिड़चिड़ापन और अनिद्रा (नींद न आना) जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर खतराः नवजात
शिशुओं, छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के नाजुक मानसिक और शारीरिक विकास के लिए डीजे का तेज बेस और शोर बेहद खतरनाक होता है।
छत्तीसगढ़ में डीजे के कारण इनकी हुई मौत
बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र (मार्च 2025): हिंदू
नववर्ष की एक शोभायात्रा के दौरान डीजे के अति-उच्च कंपन (Vibrations) के कारण एक पुराने मकान का छज्जा भरभरा कर गिर गया था। इस दर्दनाक हादसे में एक 11 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी और कई अन्य बच्चे व छात्र घायल हुए थे। इस घटना पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था।
संबलपुरी, सकरी थाना (सितंबर 2026): गणेश पंडाल में डीजे का साउंड (आवाज) बढ़ाने की मामूली बात पर हुए खूनी विवाद में एक 22 वर्षीय युवक (आकाश सूर्यवंशी) की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी।
बलरामपुर (Balrampur) राजपुर क्षेत्र (2025):
डीजे की अत्यधिक तेज आवाज के बीच नाचते-नाचते एक किशोर अचानक चक्कर खाकर गिर गया और उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक, डीजे के अत्यधिक तेज साउंड प्रेशर के चलते उसे दिल का दौरा (हार्ट अटैक) आया था।
सनावल क्षेत्रः इस क्षेत्र में भी एक युवक की तेज आवाज के कारण सिर की नस फटने (ब्रेन हैमरेज) से मौत की घटना रिपोर्ट हुई थी।
रायपुर सदर बाजार (सितंबर 2026): झांकी के
दौरान बज रहे बेहद भारी डीजे और धुमाल के तीव्र कंपन की वजह से एक 80-90 साल पुराना तीन मंजिला जर्जर मकान ढह गया। हालांकि, रात का समय होने के कारण इसमें कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कंपन के बड़े खतरे को इसने दोबारा साबित किया।
हार्ट अटैक से मौतें : रायपुर के स्थानीय प्रशासन व
महापौर के अनुसार पूर्व में गणेश विसर्जन झांकियों के दौरान अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण के कारण दो बुजुर्गों की हार्ट फेल होने से मौत की पुष्टि भी हो चुकी है।
सरगुजा अंबिकापुर क्षेत्र (2024): घर के बाहर बज
रहे तेज डेसिबल वाले डीजे साउंड के प्रभाव से एक व्यक्ति को ब्रेन हैमरेज हो गया था, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में वेंटिलेटर/उच्च इलाज के लिए रायपुर रेफर करना पड़ा था।
ये राज्य भी छूता नहीं
सीहोर (मध्य प्रदेश): मार्च 2026 में तेज आवाज और
डीजे की धमक (कमपन) के कारण एक बुजुर्ग महिला को दिल का दौरा (हार्ट अटैक) आने से मौत होने की घटना सामने आई थी।
बरेली (उत्तर प्रदेश): अगस्त 2026 में एक 60 वर्षीय
महिला की तेज आवाज वाले डीजे के पास से गुजरने के दौरान सीने में तेज दर्द के बाद मौत हो गई।
विजयनगरम (आंध्र प्रदेश): सितंबर 2025 में गणेश
विसर्जन के दौरान तेज डीजे की आवाज पर नाच रहे 22 वर्षीय युवक की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो थी।


