जांजगीर(समाचार मित्र) रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के दिन नैला-जांजगीर शहर में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह से ही सड़कों पर धूल और कोयले के कण उड़ने के कारण राहगीरों का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रातभर भारी कोयला वाहनों की आवाजाही के कारण शहर की सड़कों और आसपास के इलाकों में धूल एवं कोयले की परत जम गई है।
भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़क की स्थिति भी प्रभावित हो रही है। उड़ते कोयले और धूल के कारण घरों के बाहर खड़े वाहन और आसपास का वातावरण गंदा हो गया। लोगों का कहना है कि घरों की खिड़कियों और दरवाजों तक कोयले की धूल पहुंच रही है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
स्थानीय नागरिकों में उड़ते कोयले के कणों को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंता भी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि लगातार धूल और कोयले के कणों के संपर्क में आने से सांस लेने में परेशानी तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय और प्रशासन द्वारा आवश्यक जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
नगरपालिका और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
शहरवासियों का आरोप है कि भारी वाहनों की आवाजाही और उससे फैल रहे प्रदूषण की समस्या को लेकर नगरपालिका एवं स्थानीय प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। त्योहार के दिन भी स्थिति जस की तस बनी रही।
नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि भारी कोयला वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित किया जाए, सड़कों की नियमित सफाई एवं पानी का छिड़काव कराया जाए और धूल-कोयला प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
अब सवाल यह है कि शहरवासियों की इस समस्या पर नगरपालिका और स्थानीय प्रशासन कब गंभीरता दिखाएगा?

