छत्तीसगढ़ (समाचार मित्र) एक तरफ़ जहां भाई भाई में मामूली से बात को लेकर विवाद हत्या जैसे गंभीर अपराधों में बदल रहे है वहीं दूसरी ओर एक भाई भाई का प्यार समाज में आपसी पारिवारिक प्रेम और स्नेह की कहानी को बयां कर रहे है। किडनी खराब होने से जिंदगी की जंग लड़ रहे बड़े भाई को छोटे भाई ने किडनी दान कर दी। रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम, त्याग और अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर सामने आई एक भाई की कहानी रिश्ते की इसी भावना को साकार करती है। किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे बड़े भाई की जिंदगी बचाने के लिए छोटे भाई ने अपनी किडनी दान करने का साहसिक फैसला लिया।
बताया जा रहा है कि बीमारी के चलते बड़े भाई की दोनों किडनियों की कार्यक्षमता बेहद प्रभावित हो गई थी और उनकी हालत लगातार गंभीर होती जा रही थी। परिवार के सामने इलाज को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी थी। ऐसे मुश्किल समय में छोटे भाई ने आगे बढ़कर अपनी किडनी दान करने की इच्छा जताई।
जरूरी चिकित्सकीय जांच और प्रक्रिया के बाद किडनी प्रत्यारोपण किया गया, जिसके बाद बड़े भाई को नया जीवन मिला। भाई के इस त्याग ने पूरे परिवार को भावुक कर दिया।
राजेश कुमार कश्यप जो कि मूल रूप से ग्राम सेमरिया, तहसील-बम्हनीडीह, जिला-जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़) के निवासी है। इनके छोटे भाई सेवक राम कश्यप जो पेशे से एक शिक्षक है ने अपने बीमार भाई की बचाने के लिए अपनी एक किडनी दान कर दी। सेवक राम ने अपनी जीवन की परवाह न करते हुए समाज में उन लोगों के मुंह पर करारा तमाचा मारा है जो चंद डिसमिल जमीनों के लिए आपस में जान के दुश्मन बन जाते है।
रक्षा बंधन पर जहां भाई-बहन एक-दूसरे की रक्षा और साथ निभाने का संकल्प लेते हैं, वहीं यह भाई अपने बड़े भाई की जान बचाकर भाईचारे, प्रेम और त्याग की मिसाल बन गया।
यह सिर्फ किडनी दान नहीं, बल्कि एक भाई द्वारा दूसरे भाई को जिंदगी का अनमोल उपहार है।

