कोरबा (समाचार मित्र) अडानी के गोद ग्राम ढनढनी में स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के कुछ हिस्सों में कचरा जमा होने के कारण गंदगी की स्थिति बनी हुई है। वहीं अडानी भवन के आसपास भी कचरा और गंदगी दिखाई देने की बात ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है। इससे उठने वाली दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों को परेशानी होने की शिकायत है।
ग्रामीणों के अनुसार कचरे का नियमित उठाव नहीं होने से कई स्थानों पर गंदगी जमा हो रही है। उनका कहना है कि कचरे की वजह से दुर्गंध के साथ मच्छर-मक्खियों की समस्या भी बढ़ रही है। ग्रामीणों ने संबंधित जिम्मेदारों से नियमित सफाई और कचरे के उचित निपटारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

अडानी द्वारा लगाया गया बिजली का खंभा टूटने के बाद भी नहीं हुआ सुधार
ग्रामीणों ने गांव में बिजली व्यवस्था से जुड़ी एक अन्य समस्या की ओर भी ध्यान दिलाया है। ग्रामीणों के मुताबिक, अडानी की ओर से गांव में लगाया गया एक बिजली का खंभा टूटकर पड़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि खंभा टूटने के बाद भी अब तक इस ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार टूटे हुए खंभे की स्थिति को देखते हुए संबंधित विभाग या जिम्मेदार प्रबंधन को मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। बिजली से जुड़ा मामला होने के कारण ग्रामीण इसे सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। हालांकि, खंभे की वर्तमान स्थिति और उसे लेकर जिम्मेदारी के संबंध में संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
गोद ग्राम में विकास के साथ व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देने की मांग
ढनढनी को अडानी द्वारा गोद लिए जाने के बाद ग्रामीणों को गांव में विकास के साथ स्वच्छता, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ-साथ पहले से मौजूद व्यवस्थाओं का नियमित रखरखाव भी जरूरी है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव में जमा कचरे को हटाने के साथ नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही टूटे हुए बिजली के खंभे की स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि किसी तरह की दुर्घटना की आशंका न रहे।
फिलहाल ढनढनी के ग्रामीणों द्वारा उठाए गए इन मुद्दों ने गांव की स्वच्छता, रखरखाव और बुनियादी सुविधाओं की निगरानी व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत सामने रखी है। अब देखना होगा कि संबंधित पंचायत, प्रशासन और अडानी प्रबंधन की ओर से इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई की जाती है।


