कोरबा (समाचार मित्र) शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई जारी है। 21 अगस्त को नगर निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय के नेतृत्व में विभिन्न क्षेत्रों में अभियान चलाकर स्कूल-कॉलेजों के 100 गज के दायरे में संचालित दुकानों और ठेलों की जांच की गई। निगम के अनुसार कार्रवाई के दौरान कुल 64 दुकानों पर कार्रवाई, 27,100 रुपये का अर्थदंड और 8 दुकानों को सील किया गया।
प्रशासन की इस कार्रवाई को नशामुक्ति की दिशा में जरूरी कदम माना जा रहा है। शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को नशे की पहुंच से दूर रखना है। हालांकि, कार्रवाई के तौर-तरीकों को लेकर कुछ दुकानदारों और व्यापारिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं।
कार्रवाई के तरीके पर व्यापारियों ने जताई नाराजगी
व्यापारियों का आरोप है कि कोटपा अधिनियम के तहत जुर्माना किए जाने के बाद नगर निगम की ओर से अलग-अलग राशि के चालान काटे गए तथा कुछ दुकानों से तंबाकू उत्पादों की जब्ती भी की गई। व्यापारियों का कहना है कि कार्रवाई नियमानुसार होनी चाहिए, लेकिन छोटे दुकानदारों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए जिससे उनमें भय का माहौल बने।
व्यापारियों के बीच यह भी चर्चा है कि कार्रवाई की आशंका से ऐसे दुकानदार भी परेशान हैं, जिनका कहना है कि उनकी दुकानें संबंधित शैक्षणिक संस्थानों से निर्धारित दूरी से बाहर हैं। उनका कहना है कि जांच के दौरान दूरी की स्पष्ट माप और नियमों की जानकारी पारदर्शी तरीके से दी जानी चाहिए।
चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने उठाए सवाल
चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज कोरबा के अध्यक्ष योगेश जैन ने निगम की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि गरीब पान ठेला संचालकों पर कार्रवाई का तरीका उचित नहीं है। उनका आरोप है कि कोटपा के तहत 200 रुपये की रसीद काटने के साथ नगर निगम द्वारा 500, 1000 और 5000 रुपये तक के चालान किए गए। उन्होंने जब्ती और दुकानों की सीलिंग पर भी सवाल उठाए।
चेम्बर अध्यक्ष ने निगम से जब्त सामान वापस करने तथा सील की गई दुकानों को नियमानुसार खोलने की मांग की है। साथ ही उन्होंने दुकानदारों से भी अपील की कि वे कोटपा अधिनियम के नियमों का पालन करते हुए तंबाकू उत्पादों की बिक्री से संबंधित प्रतिबंधों का ध्यान रखें।
आयुक्त ने दी सख्त चेतावनी
नगर निगम के अनुसार कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन और आयुक्त आशुतोष पाण्डेय के निर्देशन में नशामुक्ति भारत अभियान के तहत निगम के सभी सात जोन में टीमें गठित की गई हैं। अभियान में नगर निगम के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और पुलिस विभाग की संयुक्त भागीदारी है।
आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान दुकानदारों और ठेला संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्कूलों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, गुड़ाखू और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री या भंडारण न किया जाए। निगम ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन मिलने पर जब्ती, अर्थदंड और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
64 दुकानों पर कार्रवाई, 8 सील
अपर आयुक्त एवं अभियान के प्रभारी अधिकारी पवन वर्मा के अनुसार अभियान के दौरान निगम के सभी जोन में कुल 64 दुकानों पर कार्रवाई की गई। इनमें 8 दुकानों को सील किया गया तथा कुल 27,100 रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
निगम के अनुसार कोरबा जोन में 2, रविशंकर नगर जोन में 6 दुकानों की सीलिंग की गई। वहीं कोरबा जोन में 9, टीपी नगर में 2, कोसाबाड़ी में 16, रविशंकर नगर में 1, बालको में 7, दर्री में 11 और सर्वमंगलानगर जोन में 10 दुकानों से तंबाकू उत्पाद जब्त कर अर्थदंड की कार्रवाई की गई।
कार्रवाई जरूरी, लेकिन तरीका भी सवालों के घेरे में
तंबाकू बिक्री पर कानून का पालन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है और शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री रोकना बच्चों के हित में महत्वपूर्ण है। लेकिन दूसरी ओर व्यापारियों का कहना है कि कार्रवाई के दौरान नियम, दूरी की माप, जब्ती और अर्थदंड की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट एवं पारदर्शी होनी चाहिए।
अब सवाल यही है कि नशामुक्ति अभियान को प्रभावी बनाते हुए क्या छोटे दुकानदारों के हितों और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाया जा सकेगा? व्यापारियों और प्रशासन के बीच इसी संतुलन को लेकर शहर में चर्चा तेज है।

