छत्तीसगढ़ (समाचार मित्र) छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे बड़े और खौफनाक नक्सली हमलों में से एक 2013 के झीरम घाटी हत्याकांड मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने अपना अहम फैसला सुना दिया है। झीरम घाटी मामले में कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं सहित कुल 31 लोगों को मार दिया गया था।

झीरम घाटी हत्याकांड पर एनआईए कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं. आज इसका फैसला हो गया। लेकिन फैसले से आने से पहले एक बार फिर कांग्रेस-बीजेपी के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. 13 साल पहले हुए झीरघाटी कांड को लेकर सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है.
25 मई 2013 को हुआ था झीरम कांड
25 मई साल 2013 को कांग्रेस पार्टी ने परिवर्तन रैली झीरम घाटी से होकर गुजर रही थी. पहले से झीरम घाटी में घात लगाए नक्सलियों ने कांग्रेस की रैली पर हमला कर दिया था. नक्सलियों के हमले में कांग्रेस का पूरा शीर्ष नेतृत्व खत्म हो गया था. उस वक्त कांग्रेस पार्टी ने वर्तमान बीजेपी सरकार पर सुपारी किलिंग कराने का इल्जाम लगाया था. माओवादियों के हमले में कांग्रेस का पूरा प्रदेश शीर्ष नेतृत्व और उसकी पूरी एक पीढ़ी समाप्त हो गई थी. तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा सहित अन्य बड़े कांग्रेसी नेताओं को नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया. इनके अलावा सुरक्षाबल के जवान और आम नागरिक मारे गए थे.
अदालत ने इस मामले में शामिल सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है और सजा का फैसला सुरक्षित रखते हुए अगली सुनवाई 16 सितंबर को सजा सुनाई जाएगी। इस मामले की सुनवाई एनआईए की विशेष अदालत के न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत की बेंच में चल रही थी।
विशेष अदालत में 12 अगस्त को झीरम घाटी हमले को लेकर अंतिम सुनवाई पूरी हो गई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और निर्णय सुनाने के लिए पहले 31 अगस्त की तारीख मुकर्रर की थी जिसे बढ़ाकर 5 सितंबर कर दिया गया था।
हालांकि, बाद में इस फैसले को पांच दिन के लिए टाल दिया गया और अंततः 5 सितंबर को यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया गया।
एक हजार पन्नों की चार्जशीट की थी पेश, सभी आरोपी दोषी करार !

एनआईए ने इस मामले की विस्तृत जांच के बाद वर्ष 2015 में अदालत के समक्ष लगभग एक हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी। इस चार्जशीट में शुरुआत में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
जांच और सुनवाई के दौरान इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी बचे 10 आरोपी फिलहाल जगदलपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं।
अदालत में चले लंबे मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपना केस मजबूत करने के लिए कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके विपरीत, बचाव पक्ष की ओर से खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए अदालत में एक भी गवाह पेश नहीं किया जा सका।
इस वीभत्स हमले में कुल 32 लोगों की जान गई थी और 38 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। हालांकि, एनआईए ने अपनी चार्जशीट में आधिकारिक तौर पर 27 मृतकों की ही जानकारी दी है।
इस भीषण नक्सली हमले का मुख्य निशाना कांग्रेस के शीर्ष नेता थे। इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, बस्तर टाइगर के नाम से मशहूर पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा, और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल सहित कई प्रमुख नेताओं और सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी।


