देश/उत्तरप्रदेश (समचार मित्र) इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एससी-एसटी ऐक्ट के तहत पीड़ितों को दी जाने वाली आर्थिक राहत राशि के संभावित दुरुपयोग को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रदेश में व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि योजना का लाभ वास्तविक पीड़ितों तक ही पहुंचे और बार-बार राहत राशि का दावा करने वाले मामलों की निगरानी के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए।
झांसी के अरविंद कुमार और दो अन्य तथा संतोष कुमार दोहरे की आपराधिक अपीलों पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने यह आदेश दिया। अपीलकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि विवेचक ने प्रत्येक पीड़ित के लिए दो लाख रुपये राहत राशि का प्रस्ताव भेजा था, जिसके तहत चार्जशीट दाखिल होने तक 75 प्रतिशत यानी 1.50 लाख रुपये मिलना था। हालांकि, जिला समाज कल्याण अधिकारी ने केवल 75 हजार रुपये जारी किए। बकाया राशि के लिए दिए गए प्रत्यावेदनों पर कार्रवाई नहीं हुई।


