कोरबा/कटघोरा (समाचार मित्र) बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने के बीच कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, पिछले करीब चार महीनों में सर्पदंश के 6 से अधिक मामलों में मरीजों को उपचार के लिए दूसरे अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों का आरोप है कि रेफर किए गए मरीजों में बाद में मौत हो गई।
9 वर्ष के बच्चे की मौत, मामला कटघोरा थाना क्षेत्र का !
माता पिता के साथ घर में सो रहा 9 वर्षीय बालक मोहन सिंह गोंड को तड़के रात्रि में एक करैत सांप ने डस लिया। परिजनों को पता लगते ही सबसे पहले आनन फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा में भर्ती कराया गया जहां से स्वास्थ्य ज्यादा बिगड़ने के कारण जिला अस्पताल कोरबा रेफर कर दिया। कोरबा आते समय ही मोहन सिंह की तबियत ज्यादा बिगड़ गई और रास्ते में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। मृतक के पिता महिपाल सिंह निवासी कटघोरा वार्ड नंबर 07 ने बताया कि कटघोरा में ईलाज के लिए भर्ती कराया गया था जहां अच्छे से ईलाज नहीं होने से बच्चे की मौत हो गई।
जिला कलेक्टर का निर्देश, सभी शासकीय अस्पतालों में स्नेक एंटीवेनम रखना अनिवार्य
कोरबा जिला कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कई बार अधिकारिक तौर पर निर्देश दिया है कि प्रत्येक शासकीय अस्पतालों में स्नेक एंटीवेनम रखना अनिवार्य है, ऐसे में क्या कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटीवेनम मौजूद नहीं है या अच्छे ईलाज के आभाव में बच्चे को समय पर एंटीवेनम नहीं मिला जिससे बच्चे की मौत हो गई।
सर्पदंश जैसे गंभीर मामलों में शुरुआती उपचार और समय पर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सर्पदंश के मरीजों को पर्याप्त उपचार क्यों नहीं मिल पा रहा है और उन्हें बार-बार उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर करने की नौबत क्यों आ रही है।
इलाज की सुविधा पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाएं आम हैं। ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक दवाइयों, एंटी-स्नेक वेनम और प्रशिक्षित चिकित्सा व्यवस्था की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। यदि मरीज को तत्काल उपचार के बजाय दूसरे अस्पताल भेजा जाता है, तो रास्ते में लगने वाला समय उसकी जान के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।
जिम्मेदारी किसकी?
लगातार रेफरल और कथित मौतों के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच कर यह स्पष्ट करे कि संबंधित अवधि में कितने सर्पदंश के मरीज कटघोरा CHC पहुंचे, कितनों को ASV दिया गया, कितनों को रेफर किया गया और रेफर किए गए मरीजों की स्थिति क्या रही? सूत्रों के अनुसार पिछले 5 से 6 महीनों में 6 से ज्यादा मामलों में कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रेफर कर दिया गया है। अब हालत ये है कि यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी सर्पदंश जैसे मामलों में जान नहीं बचा पाए तो आम मरीज जाएं कहां ?
BMO ने नहीं उठाया फोन
स्वास्थ विभाग का पक्ष जानने जब विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि कंवर को फोन से संपर्क किया गया तब उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। बाद में उनका पक्ष जानने के बाद उनका पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
जिला स्वास्थ्य विभाग से कटघोरा CHC में सर्पदंश के उपचार की वास्तविक स्थिति, एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता और चिकित्सकीय व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यही है “जब सर्पदंश के मरीजों के लिए समय पर उपचार जीवन और मौत के बीच का अंतर हो सकता है, तो कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्हें पर्याप्त इलाज क्यों नहीं मिल पा रहा है”?

