छत्तीसगढ़ (समाचार मित्र) सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से राशन हासिल करने वाले परिवारों के लिए केंद्र सरकार ने ऐसा डिजिटल फरमान जारी किया है, जिसने लाखों आवेदकों की नींद उडा दी है। अब तक केवल आय और राशन कार्ड की पात्रता देखकर अनाज बांटने वाला खाद्य विभाग अब आपकी सारमाजिक पृष्ठभूमि यानी जाति का हिसाब-किताब भी मांगेगा। ‘स्मार्ट पीडीएस’ की आड़ में लागू की गई इस नई व्यवस्था के तहत नया राशन कार्ड बनवाने या पुराने में स्धार कराने के लिए आधार, मोबाइल नंबर और जन्म प्रमाण पत्र के साथ ‘जाति प्रमाण पत्र’ अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बिना कोई भी आवेदन सिस्टम में स्वीकार नहीं होगा।
डिजिटल फॉर्म ने बढाई आफत !
अब तक राज्य सरकार के पोर्टल और स्थानीय खाद्य दफ्तरों के जरिए राशन कार्ड संबंधी कार्य आसानी से निपट जाते थे. लेकिन उस व्यवस्था को पूरी तरह से ठप कर दिया गया है। नई राष्ट्रीय प्रणाली में आवेदन दर्ज होते ही नागरिक के रजिस्टर्ड मोबाइल पर एक रेफरेंस नंबर भेजा जाएगा, जिससे वह घर बैठे यह जान सकेगा कि उसकी फाडल किस अफसर की टेबल पर अटकी है। हालांकि, कहने को तो यह व्यवस्था पारदर्शी और सुगम बताई जा रही है, पर हकीकत यह है कि 5 पन्नों से भी लंबे इस ऑनलाइन फॉर्म को भरने में चॉइस सेंटरों के चक्कर काट रहे आ लोगों के पसीने छ्रट रहे हैं।
जाति बताना और प्रमाण पत्र अपलोड करना हुआ अनिवार्य !
स्मार्ट पीडीएस के ऑनलाइन फॉर्म में सामान्य जानकारी दर्ज करने के ठीक बाद ‘जाति वर्ग का प्रकार’ कॉलम जोडा गया है। इसमें सामान्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के विकल्प दिए गए हैं। श्रेणी का चूनाव करते ही सामान्य वर्ग को छोडकर अन्य सभी वर्ग के नागरिकों के लिए सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र की डिजिटल कॉपी अटैच करना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि यह दस्तावेज संलग्न नहीं किया गया तो फॉर्म आगे प्रोसेस ही नहीं होगा।
आय की सीमा गायब. आखिर किस आधार पर मिलेगी पात्रता?
इस पूरी कवायद में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि 5 पन्नों के लंबे-चौडे फॉर्म में सालाना कमाई दर्ज करने का कोर्ड विकल्प ही नहीं रखा गया है। न तो आय प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है और न ही आय की कोर्ड अधिकतम सीमा तय की गर्ड है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आय की सीमा ही तय नहीं है, तो अमीर और गरीब का भेद कैसे होगा? आर्थिक आधार को नजरअंदाज कर आखिर ‘जाति संबंधी दस्तावेज’ को राशन कार्ड की पहर्ल शर्त क्यों बनाया जा रहा है, इसे लेकर जन- सामान्य में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही है।


