एक ही नदी के दो किनारे, लेकिन हादसों का रिकॉर्ड अलग-अलग… क्या प्रशासन की अनदेखी बन रही हादसों की वजह?
जांजगीर-चांपा/कोरबा (समाचार मित्र) हसदेव नदी के किनारे बसे दो प्रमुख पिकनिक स्पॉट—जांजगीर-चांपा जिले के देवरी और कोरबा जिले के चिचोली—इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। वजह है नदी में लगातार हो रहे हादसे और खासकर देवरी की ओर बाहरी पर्यटकों की डूबने से होने वाली मौतों का सिलसिला।
हैरानी की बात यह है कि हसदेव नदी के चिचोली वाले हिस्से में भी बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाने पहुंचते हैं, लेकिन स्थानीय तौर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार वहां ऐसे बड़े हादसों का सिलसिला देवरी की तुलना में सामने नहीं आता। वहीं दूसरी ओर देवरी क्षेत्र में पिछले कई वर्षों के दौरान बाहरी लोगों के नदी में डूबने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
कल फिर हुआ बड़ा हादसा, 3 छात्र बह गए !
शुक्रवार को बिलासपुर से हसदेव नदी के देवरी क्षेत्र में पिकनिक मनाने पहुंचे इंजीनियरिंग कॉलेज के 8 छात्रों के दल में से 3 छात्रों के नदी में बह जाने की सूचना ने इलाके में हड़कंप मचा दिया। एक छात्र के किसी तरह बच निकलने की जानकारी सामने आई, जबकि लापता छात्रों की तलाश जारी है। एक छात्र का शव सक्तीगुड़ी के पास बरामद हुआ है।
इस घटना ने एक बार फिर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर देवरी क्षेत्र में ही बार-बार बाहरी लोग नदी की गहराई और तेज बहाव का शिकार क्यों हो रहे हैं?
रहस्मयी शक्ति या नदी का भूगोल है हादसों की असली वजह?
संभव है कि इसके पीछे कोई रहस्यमयी शक्ति नहीं, बल्कि नदी की अचानक बढ़ती गहराई, पानी के भीतर बने गड्ढे, फिसलन भरे पत्थर, भंवर और तेज जलधारा जैसे प्राकृतिक कारण हो सकते है। परंतु कई स्थानीय लोग इस जगह को अब अदृश्य शक्ति का प्रकोप मानने लगे है।
स्थानीय लोगों को पता है कि कहां पर जाकर खतरा है परंतु पिकनिक मनाने आने वाले अधिकांश लोग स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों से अनजान होते हैं। नदी किनारे सामान्य पानी देखकर वे आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन कुछ कदम बाद पानी की गहराई और बहाव अचानक बदल सकता है। यही लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
क्या प्रशासन की चेतावनी पर्याप्त है?
सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की व्यवस्था को लेकर भी है।
क्या यहां आने वाले पर्यटकों को स्पष्ट रूप से बताया जाता है कि कहां तक जाना सुरक्षित है और किस स्थान के आगे जाना जानलेवा हो सकता है?
क्या नदी के संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग, गहराई की जानकारी और सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है?
अगर यह क्षेत्र वर्षों से पिकनिक के लिए इस्तेमाल हो रहा है और यहां लगातार डूबने की घटनाएं होती रही हैं, तो प्रशासन को इस स्थान को सामान्य पिकनिक स्पॉट की तरह नहीं बल्कि संभावित दुर्घटना क्षेत्र के रूप में चिन्हित करने की जरूरत है।
और वह सवाल… जिसे लोग रहस्य से जोड़ते हैं !
स्थानीय स्तर पर कभी-कभी यह चर्चा भी सुनने को मिलती है कि आखिर बार-बार बाहरी लोग ही इस स्थान पर हादसे का शिकार क्यों होते हैं? कुछ लोग इसे किसी “अदृश्य शक्ति” या रहस्यमयी घटना से जोड़कर देखते हैं।
लेकिन ऐसी किसी शक्ति के अस्तित्व का कोई प्रमाण सामने नहीं है। इसलिए इस तरह की मान्यताओं के बजाय वैज्ञानिक और प्रशासनिक जांच ज्यादा जरूरी है।
नदी की गहराई, जलधारा की दिशा, भंवर वाले स्थान, पानी के भीतर के गड्ढे और हादसों के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए तो शायद इस रहस्य से पर्दा उठ सकता है।
कौन है ये सुकालु- दुकालु ?
देवरी-चिचोली पिकनिक स्पॉट जितना खूबसूरत है उतना ही खतरनाक भी है। जहां नदी किनारे और बीच में मौजूद चट्टान जितना सुंदरता को बढ़ावा देता है उतना ही खतरे को भी निमंत्रण दे रहा है। स्थानीय लोग इन चट्टानों को अक्सर एक नाम से बुलाते है। देवरी नदी का घाट जहां ज्यादादार दुर्घटनाएं हो रही है उसके लिए इन दो चट्टानों को जिम्मेदार बताया जाता है जिनका नाम है सुकालु- दुकालु ! ये वो बड़े पत्थर है जिनके बीच से नदी का पानी तेज बहाव के साथ गुजरता है ठीक उससे पहले एक शांत और साफ सुथरा जगह है जहां लोग पिकनिक के दौरान नहाते और खेलते है परंतु उसके आगे खड़े खतरे को जान भी नहीं पाते, यही वो जगह है जहां फंसकर आजतक दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है।
बहने वाला आजतक नहीं बचा पाया अपनी जान !
स्थानीय लोगों के अनुसार यहां एक भंवर बनता है जिसके अंदर एक बार फंस गए तो निकलना लगभग असंभव है। वही ज्यादातर बाहरी लोग शहर से आते है जिन्हें तैरने की कला नहीं आती इसलिए वो इस जाल में फंस जाते है।
अब जरूरी है ठोस कदम उठाना
तीन छात्रों के लापता होने की घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी है।
प्रशासन को चाहिए कि देवरी पिकनिक क्षेत्र की सुरक्षा ऑडिट कराए, खतरनाक स्थानों को चिन्हित करे, बड़े और स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए, जरूरत वाले स्थानों पर बैरिकेडिंग करे तथा पिकनिक सीजन में पर्याप्त सुरक्षा एवं निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
क्योंकि सवाल केवल यह नहीं है कि “लोग नदी में क्यों डूब रहे हैं?”
सवाल यह भी है कि—
जब किसी स्थान पर बार-बार जान जा रही हो, तो अगली जान बचाने के लिए प्रशासन कब जागेगा?
(इस ख़बर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाए ताकि सभी लोग जागरूक बने और इस जगह की सच्चाई के बारे में जान सके ताकि किसी की जान आगे न जाए)
समाचार मित्र की पड़ताल जारी रहेगी…
निमेश कुमार राठौर
(मुख्य संपादक, समाचार-मित्र)


