फैक्ट्री खुलवाने कलेक्टर कार्यालय पहुंचे सैकड़ों मजदूर, कलेक्टरेट के सामने दिया धरना, बोले – 800 परिवार भुखमरी की कगार पर।
बिलासपुर/कोटा (समाचार मित्र) कोटा के छेरकाबांधा में स्थित वेलकम डिस्टलरीज प्रा.लि. का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। फैक्ट्री बंद होने के बाद शुक्रवार को सियासत और तेज हो गई।

एक पक्ष जहां फैक्ट्री को पर्यावरण के लिए खतरा बता कर बंद कराने पर अड़ा है, तो वहीं दूसरा पक्ष फैक्ट्री चालू कराने के लिए सड़क पर उतर आया है। शुक्रवार को करीब 200 से अधिक मजदूर और कर्मचारी रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कलेक्टरेट परिसर के सामने ही धरने पर बैठ गए।
मजदूरों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि वेलकम डिस्टलरी बंद होने से कोटा क्षेत्र के लगभग *800 परिवारों के सामने भुखमरी का संकट* खड़ा हो गया है। फैक्ट्री में आसवनी, बॉटलिंग और परिवहन का काम होता था, जिससे 4 हजार से अधिक लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े थे।
क्या है पूरा विवाद?
बताया जा रहा है कि पर्यावरण विभाग ने फैक्ट्री में उपयोग होने वाले स्प्रिट और अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर जांच की थी, जिसके बाद फैक्ट्री के संचालन पर रोक लगा दी गई। इसके बाद से ग्रामीणों का एक वर्ग पर्यावरण और जलस्रोतों को दूषित होने का आरोप लगाकर फैक्ट्री को स्थाई रूप से बंद करने की मांग कर रहा है।
वहीं मजदूरों और छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा से जुड़े कर्मचारी नेताओं का कहना है कि, _”फैक्ट्री से हमारा परिवार चलता है। अगर पर्यावरणीय खामी है तो प्रबंधन और विभाग मिलकर उसे सुधारें, सजा मजदूरों को क्यों?”_
मजदूरों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रबंधन, पर्यावरण विभाग और प्रशासन के बीच त्रिपक्षीय बैठक कर नियमानुसार रास्ता निकाला जाए और जल्द से जल्द फैक्ट्री को शुरू कराया जाए।
फिलहाल वेलकम डिस्टलरी अब सिर्फ फैक्ट्री नहीं, बल्कि *रोजगार बनाम पर्यावरण और राजस्व बनाम राजनीति* का बड़ा मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन होने के आसार हैं।


