छत्तीसगढ़ (समचार मित्र) छत्तीसगढ़ के इस संभाग के वनांचलों में अचानक दो बेहद गंभीर और संक्रामक बीमारियों की एंट्री से चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है। उत्तरी अमेरिका, ब्राजील और चिली जैसे देशों में पाया जाने वाला संक्रमण अब छत्तीसगढ़ के जंगलों तक पहुंच चुका है। राज्य के इतिहास में पहली बार ‘लेप्टोस्पायरोसिस’ और ‘स्क्रब टाइफस’ जैसे जानलेवा रोगों के एक साथ 50 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज टेंभुरकर के अनुसार, पूरे प्रदेश में सरगुजा ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां इन दुर्लभ बीमारियों के लक्षण पाए गए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि समय पर सटीक इलाज मिलने से अब तक किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है।
पहाड़ी कोरवा, पंडो और मांझी जनजाति पर टूटा बीमारियों का कहर
जंगलों और पहाड़ों के करीब बसे ग्रामीण इलाकों में इस खतरनाक बैक्टीरिया का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। विशेष रूप से संरक्षित जनजाति समूह जैसे पंडो, पहाड़ी कोरवा और मांझी समुदाय के लोग इस संक्रमण की चपेट में आए हैं। राहत की बात यह है कि अभी तक शहरी क्षेत्रों में इसका कोई मामला सामने नहीं आया है। पिछले छह महीनों के भीतर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराए गए सभी 40 से 50 मरीजों का तुरंत परीक्षण कर निःशुल्क इलाज किया गया, जिससे उनकी जान बचा ली गई
संक्रमित पशुओं और पानी से फैल रहा ‘लेप्टोस्पायरोसिस’ डॉ. पंकज टेंभुरकर ने इस बीमारी के फैलाव की जानकारी देते हुए बताया कि लेप्टोस्पायरोसिस मुख्य रूप से ‘लेप्टोस्पाइरा’ नामक सर्पिलाकार जीवाणु से फैलता है। चूहों, मवेशियों, कुत्तों और जंगली जानवरों के मूत्र से दूषित हुआ पानी या मिट्टी जब इंसान के संपर्क में आती है, तब यह शरीर में प्रवेश कर जाता है। बारिश और बाढ़ के दौरान इसका प्रकोप कई गुना बढ़ जाता है। इसमें मरीज को तेज बुखार, मांसपेशियों में असहनीय दर्द, आंखों में अत्यधिक लाली, पीलिया और उल्टी की शिकायत होती है। लापरवाही बरतने पर मरीज का लिवर और किडनी डैमेज हो सकता है
छोटे लाल घुन के काटने से लग रही ‘स्क्रब टाइफस’ की दीमक दूसरी बीमारी यानी ‘स्क्रब टाइफस’ के संबंध में डॉक्टरों ने बताया कि यह ‘ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी’ नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। झाडियों और नमी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में पाए जाने वाले लाल रंग के छोटे घुन (चिगर्स/माइट्स के लार्वा) के काटने से यह इंसानों में संक्रमित होती है। जिस स्थान पर यह कीड़ा काटता है, वहां काला चकता या पपड़ी जम जाती है। इसके साथ ही मरीज को कंपकंपी के साथ तेज बुखार, जोड़ों में तेज दर्द और बदन दर्द का सामना करना पड़ता है
सामान्य दवाओं से मिल रही संजीवनी, आयुष्मान योजना बनी मददगार अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की सजगता से कई गंभीर मरीजों को मौत के मुंह से बाहर निकाला गया है। डॉ. टेंभुरकर ने स्पष्ट किया कि मौसमी बुखार और वायरल संक्रमण में इस्तेमाल होने वाली सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं से ही मरीज तेजी से ठीक हो रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब और जनजातीय मरीजों का पूरा इलाज मुफ्त में किया जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
गैर-तटीय राज्य छत्तीसगढ़ के लिए क्यों बढ़ा बड़ा खतरा?
आमतौर पर लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियां समुद्र तटीय राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, तमिलनाडु या केरल) में पाई जाती है। छत्तीसगढ़ जैसे चारों तरफ जमीन से घिरे (लैंडलॉक्ड) राज्य में इसका अचानक फैलना बेहद चिंताजनक और हैरान करने वाला है। सबसे बड़ी चुनौती इसकी सही पहचान को लेकर है। स्थानीय स्तर पर डॉक्टरों को इन बीमारियों का अनुभव न होने के कारण शुरुआती दिनों में इसे मलेरिया, डेंगू या आम वायरल मान लिया जाता है। गलत जांच या देरी होने पर यह संक्रमण मरीज के लिए बेहद जानलेवा साबित हो सकता है, इसलिए स्वास्थ्य महकमा अब पूरे क्षेत्र में विशेष निगरानी रख रहा है।

