कोरबा (समाचार मित्र) गरीबी, अभाव और संघर्ष को पीछे छोड़कर कोरबा जिले के पाली विकासखंड के छोटे से गांव केराकछार की बेटी संजू देवी रावत ने खेल जगत में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। श्रमिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली 24 वर्षीय संजू ने अंतरराष्ट्रीय कबड्डी में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया है। अब उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए शानदार प्रदर्शन करना है।
नवंबर 2025 में ढाका, बांग्लादेश में आयोजित महिला कबड्डी वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत का मुकाबला चीनी ताइपे से हुआ। भारत ने यह मुकाबला 35-28 से अपने नाम कर विश्व कप का खिताब जीता। इस ऐतिहासिक जीत में संजू देवी की भूमिका बेहद अहम रही। फाइनल मुकाबले में उन्होंने 16 रेड पॉइंट हासिल किए और भारत को विश्व विजेता बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट (MVP) चुना गया।
संजू छत्तीसगढ़ के इतिहास में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाली और महिला कबड्डी वर्ल्ड कप में खेलने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनीं। उनकी सफलता केवल विश्व कप तक सीमित नहीं है। मार्च 2025 में ईरान में आयोजित 6वीं महिला एशियन कबड्डी चैंपियनशिप में भी उन्होंने भारतीय टीम का हिस्सा रहते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया था।
दो बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत को चैंपियन बनाने में योगदान देने वाली संजू की उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें रायपुर स्थित निवास पर सम्मानित किया। राज्य सरकार की ओर से उन्हें 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई।
अब एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व
संजू देवी का सफर अब और बड़े मंच की ओर बढ़ रहा है। उनका चयन एशियन गेम्स 2026 की भारतीय महिला कबड्डी टीम में हुआ है। जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले 20वें एशियन गेम्स में वह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। महिला कबड्डी के मुकाबले 21 से 26 सितंबर तक खेले जाएंगे।
संघर्ष को बनाया अपनी ताकत
अपनी सफलता को लेकर संजू देवी का कहना है कि उन्होंने गरीबी और अभावों के बीच संघर्ष करते हुए कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। उनका मानना है कि जीवन में बाधाओं के बीच पहली सीढ़ी पार करने के बाद ही दूसरी सीढ़ी चढ़ने का मौका मिलता है। खेल के प्रति जुनून, समर्पण, अनुशासन, मानसिक मजबूती और कठोर परिश्रम को वह अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती हैं।
पाली ब्लॉक के छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली संजू देवी आज हजारों बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने साबित किया है कि संसाधनों की कमी सपनों की राह में अंतिम बाधा नहीं होती। अगर जुनून, मेहनत और हौसला हो तो गांव की मिट्टी से निकलकर भी विश्व विजेता बना जा सकता है।

