छत्तीसगढ़/रायपुर (समाचार मित्र) छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के छोटे से गांव केराकछार की संजू देवी की कहानी अभावों से निकलकर इंटरनेशनल स्पोर्ट्स तक पहुंचने की मिसाल है। कभी परिवार की आर्थिक जरूरतों के लिए माता-पिता के साथ मजदूरी करने वाली संजू ने कबड्डी को अपना करियर बनाया और आज भारतीय महिला कबड्डी टीम की प्रमुख रेडर के रूप में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
2025 महिला कबड्डी विश्व कप में भारत को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाने के बाद उन्हें टूर्नामेंट की मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर (MVP) चुना गया। अब 2026 एशियन गेम्स में भी वह भारतीय टीम का हिस्सा रहीं और गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम में अहम भूमिका निभाई।
छत्तीसगढ़ के लिए संजू की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह प्रदेश से भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला कबड्डी खिलाड़ी हैं। छत्तीसगढ़ युवा आयोग की वेबसाइट भी इसे प्रदेश के कबड्डी इतिहास की पहली ऐसी उपलब्धि के रूप में दर्ज करती है।
कक्षा पांचवीं से शुरू हुआ कबड्डी का सफर
संजू देवी का जन्म 19 दिसंबर 2002 को कोरबा जिले के पाली विकासखंड के केराकछार गांव में हुआ। गांव के सरकारी स्कूल में कक्षा पांचवीं से उन्होंने कबड्डी खेलना शुरू किया। गांव में खेल सुविधाओं का अभाव था, लेकिन संजू ने इसे अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया।
शुरुआत में उन्हें कोरबा तक पहुंचने के लिए रोजाना करीब तीन घंटे का सफर करना पड़ता था। इसके बाद भी उनका अभ्यास जारी रहा। साल 2021 में उनकी प्रतिभा पर कोरबा जिला कबड्डी संघ के सचिव अनुज प्रताप सिंह की नजर पड़ी। उन्होंने संजू को ट्रेनिंग और रहने की सुविधा दिलाने में मदद की। बाद में संजू का सेलेक्शन बिलासपुर की बहतराई स्थित महिला आवासीय कबड्डी अकादमी में हुआ। यहीं कोच दिल कुमार राठौड़ के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी रेडिंग को मजबूत किया


