हितग्राहियों ने लगाया आरोप, 2 से 3 माह से नहीं मिली शक्कर, ऑनलाइन रिकॉर्ड में वितरण दर्ज होने का दावा !
कोरबा (समाचार मित्र) कोरबा जिले में शासकीय उचित मूल्य की दुकान में खाद्य सामग्रियों के वितरण में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। बिना हितग्राहियों को शक्कर दिये ही उनके राशनकार्ड में ऑनलाइन चढ़ा दिया जा रहा है।
मामला कोरबा जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत पतरापाली का !
ग्राम पंचायत पतरापाली में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन वितरण को लेकर गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। हितग्राहियों का कहना है कि उन्हें पिछले 2 से 3 माह से शक्कर का वितरण नहीं किया गया, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में उनके राशन कार्ड पर शक्कर वितरण की जानकारी अपडेट दिखाई जा रही है।
हितग्राहियों के अनुसार, राशन दुकान से उन्हें निर्धारित मात्रा में शक्कर नहीं मिली है। इसके बावजूद ऑनलाइन प्रविष्टि में शक्कर का वितरण दर्ज होने से राशन व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में शक्कर का वितरण नहीं किया गया और ऑनलाइन रिकॉर्ड में उसका वितरण दर्ज किया गया है, तो मामले की जांच आवश्यक है। ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण में अंतर पाए जाने पर राशन वितरण में अनियमितता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण की जांच की मांग !
मामले की संपूर्ण जानकारी खाद्य निरीक्षक श्री सिद्धार्थ जी को दिया गया है। खाद्य विभाग के अधिकारियों से मामले की जांच कराने की मांग की है। आरोप है कि राशन दुकान के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, ऑनलाइन प्रविष्टियों और हितग्राहियों के राशन कार्ड का मिलान कराया जाए, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
महिला समिति के नाम पर दर्ज चला रहे पुरुष !
खास बात ये है कि राशन दुकान महिला स्व सहायता समूह के नाम पर संचालित है जबकि मौके पर कोई महिला समिति के सदस्य मौजूद नहीं थे। राशन दुकान का संचालन मौके पर एक पुरुष व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है जिससे कई सवाल खड़े हो रहे है।
मौके पर मौजूद हितग्राहियों ने बताया कि सुबह 6 बजे से राशन सामग्री के आए है परंतु शाम 4 बजे तक भी उन्हें राशन नहीं दिया गया था मौके पर जब समाचार मित्र की टीम पहुंची तो दुकान संचालक ने दुकान बंद का दिया और हितग्राहियों को अगले दिन आने के लिए कह दिया।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या मौके पर जांच कर ऑनलाइन दर्ज वितरण एवं वास्तविक रूप से वितरित शक्कर की स्थिति का सत्यापन किया जाता है।
नोट: मामले में संबंधित राशन दुकान संचालक अथवा खाद्य विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


