बिलासपुर/कोटा (समाचार मित्र) केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत कोटा विकासखंड में आदिवासी छात्रावासों में बनाए जा रहे 14 अतिरिक्त कक्षों के निर्माण में भारी अनियमितता और गुणवत्ता से खिलवाड़ का मामला सामने आया है। विधायक के औचक निरीक्षण के बाद अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
निरीक्षण में खुली पोल, विधायक ने लगाई लताड़ !
कोटा विधायक ने हाल ही में निर्माणाधीन हॉस्टलों का निरीक्षण किया। मौके पर पाया गया कि स्वीकृत एस्टीमेट के अनुसार जहां 16 MM का सरिया लगना था, वहां ठेकेदार द्वारा 12 MM और 8 MM का सरिया* लगाकर खानापूर्ति की जा रही है। गुणवत्ता इतनी खराब है कि स्थानीय लोगों का कहना है कि ये इमारतें 6 से 8 महीने भी नहीं टिक पाएंगी।
विधायक ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाते हुए ठेकेदार का टेंडर निरस्त कर तत्काल ब्लैकलिस्ट करने और नए सिरे से निर्माण कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दूरस्थ आदिवासी गांवों में इस तरह घटिया निर्माण न सिर्फ सरकारी खजाने को चूना लगाना है, बल्कि आदिवासी बच्चों के जीवन से खिलवाड़ भी है।
शिकायतों का अंबार, कार्रवाई शून्य !
ग्रामीणों का आरोप है कि इस भ्रष्टाचार की शिकायत पहले भी कई बार की जा चुकी है –
– आदिम जाति कल्याण विभाग की पूर्व सचिव सोनमणि बोरा को बिलासपुर दौरे के दौरान मौखिक शिकायत की गई। विभाग के वर्तमान सचिव व आयुक्त को लिखित शिकायत भेजी गई।
CM हेल्पलाइन में भी मामला दर्ज कराया गया।
इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिला अधिकारी संजय चंदेल ने भी पूर्व में मौके का मुआयना किया था, लेकिन ठेकेदार ने निरीक्षण की भनक लगते ही सिर्फ पिलर के ऊपरी हिस्से में सही सरिया लगाकर लीपापोती कर दी।
समय-सीमा खत्म, काम अधूरा !
इन 14 अतिरिक्त कक्षों को 4 महीने में पूरा करना था, लेकिन तय समय-सीमा खत्म हुए महीनों बीत गए, फिर भी अधिकांश काम अधूरे हैं। निर्माण स्थल पर सुपरविजन के लिए कोई इंजीनियर तक मौजूद नहीं रहता। ट्राइबल कमिश्नर से बात करने पर विभागीय इंजीनियरों की कमी का हवाला दिया जा रहा है।
विधायक प्रतिनिधि ने उठाए सवाल !
विधायक प्रतिनिधि सबलू पांडेय ने कहा समय-सीमा बीतने और लगातार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई न होना ठेकेदार की मनमानी और विभागीय अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका का सीधा प्रमाण है। दोषियों पर आपराधिक मामला दर्ज कर भुगतान की रिकवरी होनी चाहिए।
क्या है मांग?
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि –
1. पूरे निर्माण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय तकनीकी टीम से जांच हो।
2. दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर अब तक किए गए भुगतान की वसूली हो।
3. कलेक्टर मामले का स्वयं संज्ञान लेकर सही सुपरविजन कराएं।
विधायक ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो सभी सबूतों और तस्वीरों के साथ यह मुद्दा *विधानसभा के पटल पर उठाया जाएगा।


