छत्तीसगढ़/रायपुर (समाचार मित्र) राजधानी रायपुर में गुमशुदगी के मामले अब सिर्फ तलाश तक सीमित नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद पुलिस परिस्थितियों के आधार पर यह भी जांच कर रही है कि कहीं लापता व्यक्ति को बंधक बनाकर तो नहीं रखा गया या गलत तरीके से छिपाया गया है। इसी के बाद शनिवार से रविवार के बीच 24 घंटे में रायपुर कमिश्नरेट और ग्रामीण थाना क्षेत्रों में गुमशुदगी की 159 FIR दर्ज की गई हैं।
सबसे ज्यादा महिलाएं लापता, आंकड़े चौंकाने वाले
दर्ज मामलों में सबसे अधिक संख्या महिलाओं की है। कुल 78 महिलाएं लापता हैं, जिनमें गृहणियां, नवविवाहिता और कामकाजी महिलाएं शामिल हैं। इसके अलावा 54 वयस्क पुरुष, 17 बच्चे व नाबालिग और 10 बुजुर्ग लापता हैं। नाबालिगों में स्कूल, ट्यूशन या घर से गायब हुए बच्चे हैं, जबकि कुछ बुजुर्ग स्वास्थ्य संबंधी परेशानी या मानसिक कमजोरी से जूझ रहे थे। आंकड़ा कई सवाल खड़े करता है कि महिलाएं इतनी बड़ी संख्या में क्यों लापता हो रही हैं?
रायपुर कमिश्नरेट और ग्रामीण थानों का ब्यौरा
रायपुर कमिश्नरेट में सबसे ज्यादा मुजगहन में 16, उरला में 18, गुढ़ियारी में 13, खमतराई में 11, टिकरापारा में 9, डीडी नगर, पंडरी में 7-7, आमानाका, गंज, राजेंद्र नगर, खम्हारडीह में 5-5, तेलीबांधा में 4, सरस्वती नगर, पुरानी बस्ती में 3-3, सिविल लाइन, मौदहापारा में 2-2 और आजाद चौक, गोलबाजार, कोतवाली, कबीर नगर में 1-1 मामला दर्ज हुआ है।
वहीं ग्रामीण थानों में खरोरा में 7, तिल्दा नेवरा में 5, अभनपुर, धरसीवां, मंदिर हसौद, सिलतरा में 4-4, आरंग, गोबरा नवापारा, माना कैंप में 3-3, विधानसभा में 2 और राखी में 1 मामला सामने आया है।
गुमशुदगी के पीछे की वजहें क्या हैं?
पुलिस के मुताबिक गुमशुदगी के पीछे पारिवारिक कलह और घरेलू विवाद प्रमुख कारण हो सकते हैं। पति-पत्नी के बीच विवाद, परिजनों से अनबन, प्रेम संबंध, आर्थिक परेशानी, बेरोजगारी, नशे की लत, संपत्ति विवाद और घरेलू हिंसा के कारण भी लोग घर छोड़ देते हैं। किशोरों में पढ़ाई का दबाव, दोस्तों या प्रेम संबंधों का असर भी कारण बनता है। हालांकि हर मामले में वजह अलग होती है और जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद सभी गुम प्रकरणों में अपराध दर्ज कर जांच की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। अब असली कसौटी यही है कि इस बदली व्यवस्था से लापता लोगों तक पुलिस कितनी जल्दी पहुंचती है।
-तारकेश्वर पटेल, डीसीपी


