छत्तीसगढ़ (समाचार मित्र) प्रदेश में जेल सुधार की दिशा में एक नई शुरुआत हुई है. प्रदेश का पहला ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशन यानी खुली जेल अब दुर्ग केंद्रीय जेल में शुरू हो गया है. मंगलवार को डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने इसका औपचारिक शुभारंभ किया. इस मौके पर जेल अधीक्षक मनीष संभाकर समेत जेल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बंदी मौजूद रहे.
ओपन जेल में 30 बंदियों के रहने की व्यवस्था !
दरअसल इस ओपन जेल की सबसे खास बात यह है कि यहां अच्छे आचरण और निर्धारित पात्रता वाले बंदियों को सामान्य जेल व्यवस्था से अलग काम करने का अवसर दिया जाएगा. फिलहाल यहां 30 बंदियों के रहने की व्यवस्था की गई है. इनमें से चयनित बंदी सुबह निर्धारित काम के लिए जेल परिसर से बाहर जा सकेंगे और दिनभर काम करने के बाद शाम 6 बजे तक वापस जेल लौटना होगा. यह खुली जेल परिसर के अंदर ही है और कैदी जेल परिसर के कैंटीन, गौशाला और अन्य जगह पर काम कर सकेंगे.
शुरुआत में 9 बंदियों को काम के लिए बाहर जाने की अनुमति दी जाएगी. यानी बंदियों को जेल की चारदीवारी के भीतर रखने के साथ-साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किया जाएगा- मनीष संभाकर, जेल अधीक्षक
मनीष संभाकर ने बताया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ बंदियों को बाहर भेजना नहीं, बल्कि उनके अच्छे आचरण, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना है. जेल प्रशासन का कहना है कि अच्छे आचरण वाले बंदियों का चयन कर उन्हें नियंत्रित व्यवस्था में काम करने का अवसर दिया जाएगा.
कोई परिसर नहीं किया गया तैयार !
खास बात यह है कि ओपन जेल के लिए अलग से नया परिसर तैयार नहीं किया गया है, बल्कि दुर्ग केंद्रीय जेल में पहले से मौजूद अधोसंरचना का उपयोग करते हुए यह व्यवस्था विकसित की गई है. जेल प्रशासन को उम्मीद है कि यह पहल बंदियों को सुधार के साथ समाज में दोबारा स्थापित करने में मददगार सबित हो सकती है.


