नई दिल्ली (समचार मित्र) पेट्रोल में मिलाए गए एथेनॉल की सटीक मात्रा पेट्रोल पंप की मशीन और ईंधन की रसीद पर स्पष्ट रूप से दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत लेकर संबंधित हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी है।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरैश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ के समक्ष यह मामला आया। याचिकाकर्ता अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी ने दलील दी कि उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि वे जो पेट्रोल खरीद रहे हैं, उसमें एथेनॉल की कितनी मात्रा मिलाई गई है।
याचिका में मांग की गई थी कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर डिस्पेंसिंग नोजल में एथेनॉल का प्रतिशत स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए। साथ ही, प्रत्येक पेट्रोल बिल या रसीद पर भी एथेनॉल की मात्रा दर्ज करने की व्यवस्था की जाए।
इसके अलावा याचिका में अलग-अलग वाहनों के लिए E20 और अन्य एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की उपयुक्तता बताने वाला सार्वजनिक डेटाबेस बनाने तथा E20 ईंधन के वाहनों, माइलेज, इंजन, रखरखाव और पर्यावरण पर प्रभाव का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट का रुख करने की छूट दे दी

