जांजगीर-चांपा (समाचार मित्र) जिला अस्पताल जांजगीर में बर्न यूनिट की सुविधा नहीं होने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में ग्राम कोसमंदा निवासी 5 वर्षीय बच्ची स्व. रियांशी की झुलसने से इलाज के दौरान मौत के बाद अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए जिला स्तर पर समुचित बर्न यूनिट और आवश्यक उपचार की सुविधा का अभाव मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी परेशानी बन रहा है। ऐसे मामलों में मरीजों को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों की ओर रेफर करना पड़ता है, जिससे समय और संसाधन दोनों की चुनौती बढ़ जाती है।
5 वर्षीय बच्ची की मौत की घटना के बाद अब लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में बर्न मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाएं आखिर कब उपलब्ध होंगी?
स्वास्थ्य विभाग को जनसहयोग से सुविधा देने की तैयारी
मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी को देखते हुए ग्राम पंचायत कोसमंदा सरपंच संजय रत्नाकर, कृष्णा टंडन, महासचिव, राष्ट्रीय पत्रकार संघ छत्तीसगढ़ स्वैच्छिक जनसहयोग के लिए आगे आए हैं। उनका कहना है कि सरकार के पास पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए राशि नहीं है इसलिए चंदा मांगकर सरकार को बर्न यूनिट स्थापित करने सहयोग राशि करेंगे।
बताया गया है कि बर्न यूनिट एवं मरीजों के हित में आवश्यक सुविधाओं के लिए जनसहयोग के माध्यम से राशि एकत्र कर स्वास्थ्य विभाग को सहयोग देने की तैयारी की जा रही है।
यह पहल एक ओर समाज के सहयोग की भावना को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है—क्या सरकारी अस्पताल में बर्न यूनिट जैसी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा के लिए भी समाज को चंदा जुटाने की जरूरत पड़नी चाहिए?
सरकार से उठी मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि जिला अस्पताल जांजगीर में जल्द से जल्द आधुनिक बर्न यूनिट, प्रशिक्षित स्टाफ, आवश्यक उपकरण और पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सके।
5 वर्षीय बच्ची की मौत ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग और सरकार इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जिला अस्पताल में बर्न मरीजों के लिए सुविधाएं कब तक उपलब्ध कराई जाती हैं।
समाचार मित्र की रिपोर्ट।

