जांजगीर-चांपा (समाचार मित्र) सावन माह के अंतिम सोमवार को श्रद्धालुओं को बांटने के लिए बनाए खीर में एक 5 वर्षीय बच्ची खेलते खेलते अचनाक गिर गई, जिससे बच्ची का शरीर झुलस गया परिजन बच्ची को तत्काल जिला अस्पताल लेकर गए लेकिन जिला अस्पताल में बर्न यूनिट नहीं होने से सिर्फ प्राथमिक उपचार के पश्चात बिलासपुर रेफर कर दिया गया, और 5 दिन के बाद बच्ची की मौत हो गई। मामला चांपा थाना अंतर्गत ग्राम कोसमंदा की है। बच्ची का नाम रियांशी सूर्यवंशी पिता का नाम अजय कुमार सूर्यवंशी है।
जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल जांजगीर में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल में बर्न यूनिट की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण आग से झुलसे मरीजों को उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल में बर्न यूनिट पहले संचालित था, लेकिन वर्तमान में यह बंद पड़ा है।
जिला अस्पताल जांजगीर में एक 5 वर्षीय बच्ची को आग से झुलसी हालत में उपचार के लिए लाया गया। अस्पताल में बच्ची को प्राथमिक उपचार के रूप में मलहम-पट्टी की गई, इसके बाद बेहतर उपचार के लिए उसे बिलासपुर सिम्स रेफर कर दिया गया।
बच्ची को रेफर किए जाने के बाद परिजनों में नाराजगी देखने को मिली। परिजनों का कहना है कि जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में यदि बर्न यूनिट की सुविधा ही उपलब्ध नहीं होगी तो गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को समय पर उपचार कैसे मिलेगा? उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण बर्न यूनिट बंद पड़ा है, जिसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है।
परिजनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिला अस्पताल जांजगीर में बर्न यूनिट को जल्द से जल्द पुनः शुरू किया जाए, ताकि आग से झुलसे मरीजों को तत्काल और बेहतर उपचार मिल सके। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बर्न यूनिट शुरू नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर क्या कदम उठाता है और जिला अस्पताल में बंद पड़ी बर्न यूनिट को कब तक पुनः शुरू किया जाता है।

