छत्तीसगढ़/कोरबा (समाचार मित्र) मोबाइल फोन की लत अत्यंत घातक होता जा रहा है। स्थानीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल के बीते आठ माह’ में 57 लोगों ने आत्महत्या की है। इस लिहाज से प्रतिमाह औसतन 7 लोगों ने मौत को गले लगाया है। अब करतला थाना क्षेत्र के मजदूर की पत्नी ने केवल ‘इसलिए जान ‘दे दी, क्योंकि नेटवर्क रुक जाने से मोबाइल पर सीरियल नहीं देख पाईं।
जानकारी के अनुसार करतला थानांतर्गत ग्राम केराकछार में प्रेमलाल सारथी 55 वर्ष निवास करता है। वह रोजी मजदूरी कर पत्नी मंगलो बाईं 52 वर्ष के अलावा दो बच्चों का पालन पोषण करता था, जबकि बड़ा पुत्र अपने परिवार के साथ कोरबा में रहता है। प्रेमलाल की पत्नी’ मंगलो बाई मोबाइल में वीडियो देखना पसंद करती थी। शनिवार की दोपहर करीब 12 बजे प्रेमलाल कहीं गया था उसकी पत्नी मोबाइल पर सीरियल देखते हुए “खाना खा रही थीं।
सीरियल देखते हुए एकाएक मोबाइल का नेटवर्क गायब हो गया। जिससे महिला परेशान हो गई। वह थोडी देर तक नेटवर्क का इंतजार करती रही.. लेकिन नेटवर्क के अभाव में सीरियल दोबारा शरू नहीं हुआ। इस छोटी सी बात ने महिला को इतना आक्रोशित कर दिया कि उसने मोबाइल को जमकर जमीन पटककर तोड दिया। इसके बाद खुद कमरे में चली गईं। उसने कमरे कों भीतर से बंद कर लिया। वह करीब दस मिनट बाद कमरे से निकली और बरामदे में लगे खाट में जाकर बैठ गई। थोड़ी देर बाद उसे लगातार उल्टी होने लगी। घर में मौजूद पुत्र व पुत्री को माजरा समझः नहीं आया। पहले तो वे मां को तबायत खराब होने की बात सोच रहे थे. लेकिन जहरीले पढाथे का दर्गध ‘आने पर संदेह हआ पत्नी की तबीयत बिगडने को जानकारी होने पर प्रेमलाल भी घर पहुंचा। उसने बच्चों के साथ कमरे के भीतर जाकर देख तो कीटनाशक का खाली डिब्बा पडा मिला. जिससे मंगलो बाई द्वारा जहर सेवन करने की बात समझते ‘देर नहीं लगी। उन्होंने आनन- फानन डॉयल 112 की मदद से महिला को ईलाज के लिए करतला स्थित सामदायिक स्वास्थ्य केंद्र दाखिल कराया, जहां से उसे शाम करीब पांच बजे संजीवनी एक्सप्रेस की मदद से कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया। यहां घंटे भर के भीतर उपचार के दौरान महिला की मौत हो गईं.। अस्पताल पुलस ने वैधानिक कार्रवाई उपरांत मतिका के शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।



