कोरबा (समाचार मित्र) करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित कोरबा-चांपा नेशनल हाईवे 149B की गुणवत्ता पर अब सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और यात्रियों का आरोप है कि निर्माण के महज दो वर्ष के भीतर ही कई स्थानों पर सड़क टूटने लगी है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संदेह पैदा हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, हाईवे के कई हिस्सों में दरारें और गड्ढे दिखाई देने लगे हैं। आरोप है कि सड़क की मरम्मत के दौरान निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है तथा डामर (बिटुमिन) की जगह सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है, जिससे मरम्मत कार्य टिकाऊ साबित नहीं हो रहा। परिणामस्वरूप कुछ ही समय में सड़क दोबारा क्षतिग्रस्त हो रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते हैं और यात्रियों से सोहागपुर टोल में प्रतिदिन लाखों रुपये का टोल भी वसूला जाता है, लेकिन इसके बावजूद सड़क का रखरखाव संतोषजनक नहीं है। आरोप है कि सोहागपुर टोल नाका में भारी वाहनों से बिना ओवरलोड की जांच कराए ही अवैध वसूली कर छोड़ दिया जा रहा है। गौरतबल है कि ज्यादातर भारी वाहनों का ओवरलोड जांच हो ही नहीं रहा है। लोगों का सवाल है कि जब टोल के रूप में नियमित राशि वसूली जा रही है तो सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव में लापरवाही क्यों बरती जा रही है।
वहीं सड़क किनारे लगाए गए पौधों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। पर्याप्त सिंचाई और देखरेख के अभाव में अनेक पौधे सूखने लगे हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के दावों पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है। सुशासन तिहार में भी पौधों पर पानी सिंचाई नहीं करने सम्बंधित शिकायत किया गया था जिसपर NHAI विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किया हैं।
बारिश का मौसम शुरू हो चुका है और सड़क में पहले से मौजूद गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग एवं राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से सड़क की गुणवत्ता की जांच कराने, दोषी एजेंसी पर कार्रवाई करने तथा टिकाऊ मरम्मत कार्य सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग यात्रियों की सुरक्षा और सड़क की गुणवत्ता को लेकर कब तक ठोस कदम उठाते हैं।

