कोरबा/करतला (समाचार मित्र) जंगल में मोर नाचा किसने देखा ? कहावत बहुत पुरानी है परंतु आज भी ग्राम पंचायतों में चल रहे भ्रष्टाचार पर सटीक बैठता है। उच्च अधिकारियों के निगरानी के अभाव में 15वें वित्त आयोग की राशि का ग्राम पंचायत दुरुपयोग करने में लगे हुआ है। विकास के नाम पर कुछ भी काम दर्शा दिया जाता है और किसी भी स्थान को फोटो खींचकर उसे जियोटैग कर दिया जाता है जिससे आसानी से राशि आहरित हो जाता है। कड़ी निगरानी नहीं होने से ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त आयोग की राशि का जमकर बंदरबांट हो रहा है। ताजा मामला करतला जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत रामपुर का है जहां विकास कार्यों के नाम पर गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि लगभग 6 वर्ष पूर्व निर्मित नाली को नया निर्माण कार्य बताकर सत्र 2025-26 में फिर से उसका फर्जी जियोटैग किया गया और शासन की राशि का आहरण भी कर लिया गया। मामले की सत्यता फिलहाल जांच के बाद ही आएगा परंतु डेटा ये जरूर बताते हैं कि गड़बड़ी तो है। मामले में लगभग 2.5 लाख रुपये के कथित वित्तीय अनियमितता की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है। शिकायत ये भी है कि सरपंच सचिव अपने चहते लोगों के खातों में बिना कोई फर्म या वास्तविक बिल के ही लाखों रुपए का भुगतान भी कर रहे है। मामले में जांच होगा तो पता लगेगा कि कई ऐसे लोगों के नाम पर DSC पर राशि आहरित की गई है जिन्होंने पंचायत को कोई बिल दिया ही नहीं है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस नाली का निर्माण कई वर्ष पहले हो चुका था, उसी पुराने निर्माण कार्य को नवीन कार्य के रूप में प्रदर्शित कर ऑनलाइन जियोटैगिंग की गई। इसके आधार पर निर्माण कार्य पूर्ण होना दर्शाते हुए सरकारी राशि निकाली गई। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने तथा विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का गंभीर मामला माना जाएगा।
ग्रामीणों ने बताया कि संबंधित नाली लंबे समय से उपयोग में है और उसके पुराने होने के पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं। इसके बावजूद उसे नया निर्माण बताकर भुगतान किए जाने से पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले को लेकर अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है। यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता प्रभावित होगी और सरकारी धन के दुरुपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
मामले में पंचायत सचिव जागेश्वर प्रजापति ने कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया। वही मामले में सरपंच से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई परंतु उनसे घर पर मुलाकात नहीं हो सकी।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच कराता है और आरोपों की सत्यता सामने आने पर क्या कार्रवाई की जाती है।
मामले में मौखिक शिकायत प्राप्त, आवश्यक कार्यवाही की जाएगी : जनपद CEO वैभव कौशिक
(नोट: यह समाचार स्थानीय स्तर पर प्राप्त शिकायतों एवं आरोपों के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही होगी।)

