छत्तीसगढ़ (समाचार मित्र) राज्य सरकार के कई अधिकारी छोटी छोटी अपराधों को लेकर कई बार संपत्ति जप्त कर उसे राजसात करने प्रक्रिया चलाते है। जिला कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए साफ कहा है, जब तक किसी आरोपी की दोषसिद्धि नहीं हो जाती, तब तक उसकी जब्तशूदा संपत्ति को शासन के पक्ष में राजसात नहीं किया जा सकता। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया. जिसमें आरोपी को दोषमक्त करने के बाद भी उसका डीजे साउंड सिस्टम राजसात करने का फैसला सूनाया गया था।
पढ़िए क्या था पूरा मामला?
मामला 17 मार्च 2026 की रात का है. जब केबिनपारा ग्राम बेलगहना में शादी कार्यक्रम के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने की शिकायत पुलिस को मिली थी। पूलिस ने मौके पर पहंचकर वाहन क्रमांक CG 11 AD 0570 साहेत 14 नग स्पीकर, 3 एम्प्लीफायर, 2 जनरेटर, 10 सारफ लाइट, 8 पार लाइट व अन्य उपकरणों की जब्ती बनार्ड थी।
निचली अदालत का फैसला और अपील न्यायिक मजिस्टेट प्रथम श्रेणी कोटा द्वारा 3 अगस्त 2026 को सनाए गए फैसले में श्यामलाल यादव को कोलाहल अधिनियम के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया। हालांकि, अदालत ने जब्तशूदा डीजे सेटअप को शासन के पक्ष में राजसात करने का आदेश दिया था। इस फैसले के खिलाफ अधिवक्ता विनय मिश्रा के माध्यम से सत्र न्यायालय में दाण्डिक अपील प्रस्तत की गई।
सत्र न्यायालय का निर्णय: राजसात के लिए दोषसिद्धि अनिवार्य !
अपील की सुनवाई करते हुए सत्र न्यायालय ने माना कि छत्तीसगढ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम की धारा 17 के तहत जब्तशूदा उपकरणों को राजसात करने की शक्ति केवल “दोषसिद्धि” होने पर ही लागू होती है। जब विचारण न्यायालय ने आरोपी को मूल अपराध से बरी कर दिया है, तो संपत्ति को राजसात करना कानून के सिद्धांतों के विपरीत है।


