मातृदुग्ध दान एवं स्तनपान के माध्यम से मानवता की अनुकरणीय मिसाल पेश करने वाली पांच माताएं हुईं सम्मानित।
कोरबा/करतला (समाचार मित्र) करतला विकासखंड अंतर्गत ग्राम फरसवानी में ग्राम स्वास्थ्य समिति एवं ग्राम पंचायत के संयुक्त तत्वावधान में माता यशोदा सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मातृदुग्ध एवं स्तनपान के महत्व के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना, नवजात एवं शिशुओं के समुचित पोषण और बेहतर स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करना रहा।

समारोह के दौरान क्षेत्र की ऐसी पांच माताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने मातृत्व की भावना से प्रेरित होकर अपने मातृदुग्ध का दान किया तथा ऐसे शिशुओं को स्तनपान कराया, जिन्हें किसी कारणवश अपनी जैविक माताओं का दूध उपलब्ध नहीं हो पाया। इन माताओं ने निस्वार्थ भाव से अन्य शिशुओं के स्वास्थ्य एवं पालन-पोषण में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए मानवता और मातृत्व की अनुकरणीय मिसाल पेश की।
इस अवसर पर कुमारी बाई बरेठ निवासी फरसवानी, फिरतिन बाई धनवार निवासी देवलापाठ, लक्ष्मींन बाई निवासी बगदर, सीता बाई निवासी देवलापाठ एवं सरस्वती कंवर निवासी रीवांपार को उपस्थित अतिथियों द्वारा श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाली माताओं के प्रति उपस्थित लोगों ने उनके सेवाभाव एवं मानवीय संवेदना की सराहना की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ग्राम पंचायत फरसवानी की सरपंच ज्योति बियार उपस्थित रहीं। इसके अलावा ग्राम पंचायत देवलापाठ के सरपंच नरेन्द्र बिंझवार, रीवांपार के पंच सिदार सिंह कंवर, बगदर की पंच तिरिथ बाई, डॉ. रितु सिंह (एसएमओ), ज्योति राठौर (आरएमए), जिला समन्वयक मितानिन कार्यक्रम वंदना गुप्ता, ब्लॉक समन्वयक मितानिन कार्यक्रम द्वारिका ध्रुव, स्वास्थ्य पंचायत समन्वयक गेंद बाई साहू सहित मितानिन प्रशिक्षक रथबाई कंवर एवं श्याम बाई राठौर की विशेष उपस्थिति रही।
समारोह में मितानिन सुनीता तिवारी, संध्या राठौर, पुष्पा देवी राठौर, पुष्पा साहू, सुमित्रा धनवार, सुनीता धनवार एवं तीज बाई बिंझवार सहित क्षेत्र की अन्य मितानिनों, ग्राम स्वास्थ्य समिति के पदाधिकारियों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित ग्रामीणों एवं महिलाओं को मातृदुग्ध के महत्व के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग एवं मितानिन कार्यकर्ताओं ने बताया कि मां का दूध नवजात शिशु के लिए सर्वोत्तम एवं प्राकृतिक आहार है, जिसमें शिशु के विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। महिलाओं को शिशु को समय पर स्तनपान कराने, नवजात की उचित देखभाल करने तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक सावधानियों के प्रति जागरूक किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि समाज में मातृदुग्ध दान जैसी मानवीय पहल को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। ऐसी माताएं, जो अपने बच्चे के साथ-साथ जरूरतमंद शिशुओं के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए स्तनपान कराती हैं, समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनके इस सेवाभाव से न केवल शिशुओं को पोषण मिलता है, बल्कि समाज में आपसी सहयोग, संवेदना और मानवीय मूल्यों को भी मजबूती मिलती है।
समारोह में माताओं को सम्मानित करने के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। मितानिनों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने ग्रामीण महिलाओं से अपील की कि वे गर्भावस्था से लेकर प्रसव एवं प्रसव के बाद तक स्वास्थ्य सेवाओं का नियमित लाभ लें तथा नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्तनपान एवं पोषण संबंधी आवश्यक जानकारी को अपनाएं।
आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ परिवार की आधारशिला है और स्वस्थ शिशु ही स्वस्थ समाज एवं उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है। माता यशोदा सम्मान समारोह ने मातृत्व, सेवा, संवेदना और सामुदायिक सहयोग की भावना को मजबूत करते हुए ग्रामीण क्षेत्र में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


