बलौदा (समाचार मित्र) शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और स्वावलंबन का संगम है। इस बात को चरितार्थ कर रही है ग्राम सुल्ताननार की पाठशाला।
यहां राज्यपाल पुरस्कृत आदर्श शिक्षक नरेंद्र कुमार लहरे के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा दी जा रही है जो उन्हें आत्मनिर्भर और संस्कारवान बना रही है। इसी का उत्कृष्ट उदाहरण है इस शाला का छात्र मारुति कुमार बरेठ।
मारुति छोटी उम्र में ही पूरे विद्यालय के लिए आदर्श विद्यार्थी बन गया है। प्रतिदिन समय से पहले शाला पहुंचना, साफ-सुथरी यूनिफॉर्म – चेक शर्ट, टाई, बेल्ट, माथे पर तिलक और अनुशासित रूप से प्रार्थना में खड़ा होना उसकी पहचान है। नंगे पाँव भी विद्यालय के प्रति उसकी निष्ठा में कोई कमी नहीं आती।
*राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक की पाठशाला की विशेषता:* नरेंद्र लहरे को शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, बच्चों में स्वावलंबन और संस्कार आधारित शिक्षण के लिए राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनके विद्यालय का परिसर हरा-भरा, फूलों से सजा और पूरी तरह स्वच्छ रहता है।
नरेंद्र लहरे का कहना है – “मेरा उद्देश्य हर बच्चे को मारुति जैसा स्वावलंबी, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ बनाना है। जब शिक्षक पूरी निष्ठा से पढ़ाता है तो विद्यार्थी खुद आदर्श बन जाता है।”
विद्यालय में बच्चों को किताबी शिक्षा के साथ-साथ बागवानी, स्वच्छता, प्रार्थना सभा का संचालन और बड़ों का सम्मान करना सिखाया जाता है। मारुति इन सभी गतिविधियों में सबसे आगे रहता है।
ग्रामीणों और पालकों ने भी राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक नरेन्द्र कुमार लहरे जी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सुल्ताननार की इस पाठशाला ने पूरे बलौदा क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है।

