छत्तीसगढ़ (समाचार मित्र) धान खरीदी का नया सत्र शुरू होने से पहले ही प्रदेश की धान खरीदी करने वाली सहकारी समितियों में संभावित नई व्यवस्था को लेकर चिंता का माहौल बनने लगा है। समिति सदस्यों के बीच चर्चा है कि शासन इस बार धान खरीदी के दौरान धान का उठाव तत्काल करने के बजाय खरीदी सत्र के अंतिम चरण में सीधे उठाव किए जाने की व्यवस्था पर विचार कर रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी अंतिम सरकारी आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।
समिति के कुछ सदस्यों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि यदि धान खरीदी के बाद उसका उठाव अंतिम समय तक नहीं किया गया और पूरी मात्रा को समितियों के खरीदी केंद्रों पर ही सुरक्षित रखना पड़ा, तो समितियों के सामने बड़ी व्यावहारिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
पर्याप्त जगह नहीं, बढ़ सकती है परेशानी !
समिति सदस्यों का कहना है कि कई धान खरीदी केंद्रों में पहले से ही बड़ी मात्रा में धान की बोरियां रखने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यदि लगातार खरीदी होती रही और धान का उठाव नहीं हुआ तो केंद्रों पर बोरियों के भंडारण, रखरखाव और सुरक्षा की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।
सदस्यों के मुताबिक लंबे समय तक धान खुले या सीमित भंडारण व्यवस्था में रहने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने का भी खतरा रहेगा। विशेष रूप से मौसम में नमी और धान के सूखने के कारण वजन में कमी आने की स्थिति में समितियों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है। समिति सदस्यों को फड़ में ज़ीरो शॉर्टेज देने में भी काफी परेशानी होगी।
समिति प्रबंधकों में बढ़ी चिंता !
संभावित व्यवस्था को लेकर समिति प्रबंधकों और सदस्यों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि धान खरीदी की पूरी जिम्मेदारी समितियों पर होती है, लेकिन यदि खरीदे गए धान का उठाव समय पर नहीं हुआ तो उसकी सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी भी समितियों के सामने बड़ी चुनौती बन जाएगी।
समिति सदस्यों का सवाल है कि यदि धान कई सप्ताह तक खरीदी केंद्रों में ही पड़ा रहा और इस दौरान वजन या गुणवत्ता में किसी तरह की कमी आई, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी और होने वाले नुकसान की भरपाई किस व्यवस्था के तहत की जाएगी?
आदेश आया तो हो सकता है प्रदेशव्यापी आंदोलन !
कुछ समिति सदस्यों ने स्पष्ट किया है कि यदि इस तरह की व्यवस्था को बिना पर्याप्त भंडारण सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था के लागू किया गया, तो समितियों के लिए धान खरीदी करना मुश्किल हो जाएगा। सदस्यों ने कहा कि ऐसी स्थिति में वे अपनी मांगों को लेकर प्रदेश स्तर पर आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
अब शासन के आधिकारिक निर्णय का इंतजार !
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शासन वास्तव में धान का उठाव खरीदी सत्र के अंतिम समय में कराने की व्यवस्था लागू करने जा रहा है या यह केवल स्तर पर चल रही चर्चा है।
समितियों के सदस्यों की मांग है कि यदि ऐसी कोई नई व्यवस्था प्रस्तावित है तो उसे लागू करने से पहले खरीदी केंद्रों की भंडारण क्षमता, धान की सुरक्षा, मौसम से बचाव और सूखती से होने वाले संभावित नुकसान जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
अब निगाहें शासन के आधिकारिक आदेश और आगामी धान खरीदी सत्र की व्यवस्था पर टिकी हैं।

