छत्तीसगढ़/बिलासपुर (समाचार-मित्र) छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और POCSO से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नाबालिग की उम्र के निर्धारण को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की उम्र को लेकर केवल दावा कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे विश्वसनीय और विधिसम्मत दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के माध्यम से साबित करना आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने कहा कि POCSO अधिनियम के प्रावधान लागू होने के लिए पीड़िता की उम्र का नाबालिग होना विधि के अनुसार स्थापित होना जरूरी है। जांच एजेंसी की जिम्मेदारी है कि वह उम्र से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य जुटाए तथा उनकी उचित तरीके से जांच करे।
अदालत ने मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए जांच प्रक्रिया में उम्र निर्धारण की भूमिका को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट की यह टिप्पणी POCSO मामलों की जांच करने वाली पुलिस एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मानी जा रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
POCSO कानून बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है। ऐसे मामलों में पीड़ित की उम्र का सही निर्धारण कानूनी रूप से बेहद महत्वपूर्ण होता है। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से स्पष्ट होता है कि जांच के दौरान उम्र से जुड़े साक्ष्यों को गंभीरता से जुटाना और उनका सत्यापन करना आवश्यक है।

