जेब भरने दांव पर लगा दी ग्रामवासियों की जिंदगी, बंद पड़े खदानों में पाट रहे राखड़, भूजल दूषित होने का मंडरा रहा खतरा !

कोरबा (समाचार मित्र) पर्यावरण एवं ग्रामवासियों की सुरक्षा की धज्जियां उड़ाने वाली एक ख़बर सामने आ रही है। बस्ती से लगे इलाकों में बंद पड़े पत्थर खदानों में गड्ढे भरने के लिए राखड़ भरने का मामला सामने आया है। मामला करतला जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत देवलापाठ का है जहां नियमों को ताक पर रखकर फ्लाईऐश पाटने का काम किया जा रहा है। राखड़ में मौजूद हानिकारक तत्व जैसे कि भारी धातु और एसिडिक पदार्थ जमीन और पानी को प्रदूषित कर सकते हैं, जिससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि ग्रामवासियों ने राखड़ पाटने के लिए अपने खेतों से भारी वाहनों को गुजरने की अनुमति नहीं दी तो ठेकदारों ने वन विभाग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बने प्रतिबंधित मार्ग में भी भारी वाहनों चलाया जा रहा है।
ग्राम देवलापाठ के स्थानीय लोगो का मानना है कि ठेकदारों ने खदान मालिकों को मोटे रकम देकर यह काम शुरू किया गया है परंतु राखड़ पाटने के कई दुष्परिणाम है जिसे नजरअंदाज किया गया जिसमें सर्वप्रथम जमीन प्रदूषण है जिसमें राखड़ में मौजूद हानिकारक तत्व जमीन में मिलकर उसे प्रदूषित कर सकते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो सकती है। जमीन के आस पास कई खेत मौजूद है जिसके भूमिस्वामियों ने भी इस संबंध में कलेक्टर और तहसीलदार से शिकायत किया है। दूसरा राखड़ पाटने से पानी प्रदूषण भी हो रहा है, राखड़ के गड्ढे में जमा पानी जमीन के नीचे के पानी को प्रदूषित कर सकता है, जिससे पीने के पानी की गुणवत्ता खराब हो सकती है। खदानों से निकलने वाला जल 4सीधे तौर पर भूजल श्रोतों तो जुड़ा हुआ है जिसपर पूरे ग्रामवासी प्रभावित हो सकते है। गौरतलब है कि ग्राम देवलपाठ में मौजूद ये खदान बस्ती इलाको से जुड़े हुए है जहां सैकड़ों की संख्या में लोग निवास करते है। वही राखड़ पाटने से वायु प्रदूषण भी हो रहा है। राखड़ के गड्ढे से उठने वाली धूल वायु को प्रदूषित कर सकती है, जिससे आस पास के रहवासियों को श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
वन विभाग की जमीन से हो रहा राखड़ परिवहन !
राखड़ परिवहन करने के लिए बड़े बड़े भारी वाहनों का प्रयोग ठेकदारों द्वारा किया जा रहा है हैरानी की बात है कि भारी वाहनों को वन भूमि से गुजरने की अनुमति आखिर किसने दे दी ? न केवल वन भूमि से बल्कि भारी वाहनों से राखड़ प्रधानमंत्री सड़क और देवलापाठ स्थित पिलारी नहर के रास्ते से वन विभाग की जमीन से लाया जा रहा है जिससे वन विभाग की जमीन के साथ साथ स्थानीय लोगों के लिए बनाया गया सड़क भी टूट रहा है। वन विभाग भी इस मामले में अबतक अनजान बना हुआ है।
