बड़ी ख़बर : उपार्जन केंद्र से धान के उठाव पर मार्कफेड ने लगा दी रोक, मिलर्स जारी नहीं कर पा रहे गेट पास, कोरबा में 151 करोड़ के 6.56 लाख क्विंटल धान जाम ।

कोरबा (समाचार मित्र) धान खरीदी अभियान के अंतिम पखवाड़े तक शासन की अव्यवस्था पर रोक नहीं लग सकी। कस्टम मिलिंग उपार्जन नीति के तहत जिले समेत प्रदेश के कई जिलों में धान की रीसाइक्लिंग के मामले सामने आने के बाद मार्कफेड ने समिति से लोडिंग (उठाव ) कार्य पर रोक लगा दी है। मिलर मॉड्यूल में इसकी जानकारी पेज ओपन करते ही प्रदर्शित होने पर राइस मिलर्स समेत सहकारी समितियों की चिंता बढ़ गई है। वे ऑनलाइन गेट पास जारी नहीं होने पर शनिवार को किसी भी उपार्जन केंद्र में धान के उठाव के लिए वाहन नहीं पहुंच सके। आकांक्षी जिला कोरबा में इस बदइंतजामी से समितियों के ही उपार्जन केंद्रों में खरीदकर रखे गए
6 लाख 56 हजार 740.40 समर्थन मूल्य पर 151 करोड़ 5 लाख 2 हजार 920 रुपए का धान जाम पड़ गए हैं। जल्द जाम पड़े धान का उठाव नहीं किया गया तो धान के शार्टेज होने के साथ साथ ,पर्याप्त जगह के अभाव में खरीदी प्रक्रिया बंद होने के आसार बढ़ जाएंगे।
छत्तीसगढ़ में सत्ता में आने से पूर्व ही भाजपा ने किसान एवं महिला हित में कई कल्याणकारी आर्थिक सशक्तिकरण वाली कदम उठाए जाने की घोषणा की थी। सत्ता मिलने के बाद पार्टी की सरकार पर इन वादों को पूरा करने का दबाव बढ़ गया है। जन घोषणा पत्र के इन वादों में किसानों का पूरा धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदने का संकल्प भी शामिल है। पिछले 2 साल से सरकार किसी तरह इन वादों पर खरा तो जरूर उतरी,लेकिन चालू खरीफ विपणन वर्ष 2025 -26 में सरकार की सांसे फूलने लगी है। धान विक्रय करने किसानों का एग्रिस्टैक पोर्टल में पंजीयन से लेकर डिजिटल क्राप सर्वे (गिरदावरी ), के बाद सत्यापन आदि के नाम पर टोकन की पेंच के बाद अब समिति स्तर पर खरीदे गए धान की राइस मिलर्स को डीओ जारी करने के बाद भी उठाव कार्य में रोक लगा दी गई है। इसके पीछे की वजह कुछ जिलों में धान के रीसाइक्लिंग के सामने आए मामले को लेकर उठाया गया कदम बताया जा रहा है,लेकिन अंतिम पखवाड़े में उठाए गए इस कदम से पूरे प्रदेश के उपार्जन केंद्रों में धान जाम होने के हालात निर्मित हो सकते हैं। लगभग सभी जिले खरीदी लक्ष्य से काफी पीछे चल रहे।
बात करें आकांक्षी जिला कोरबा की तो चालू खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की तो जिले को 31लाख 19 हजार क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य दिया गया था। जिसकी पूर्ति में 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 33 हजार 846 किसानों से तकरीबन 20 लाख 63 हजार 575.20 क्विंटल धान की आवक हुई है। जिसमें से 6 लाख 56 हजार 740.40 समर्थन मूल्य पर 151 करोड़ 5 लाख 2 हजार 920 रुपए का धान जाम पड़ा है। इस तरह देखें तो 31.72 फीसदी 6 धान उठाव के इंतजार में हैं। हाथी प्रभावित बरपाली (कोरबा) बरपाली (श्यांग ), कुदमुरा,चचिया ,सिरमिना ,उतरदा ,अखरापाली समेत 2 दर्जन से अधिक उपार्जन केंद्रों में बफर लिमिट से अधिक धान जाम पड़े हैं। धान के नियमित उठाव की स्थिति में ही शेष बचे किसानों के लिए धान बेचने की पर्याप्त जगह की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। लेकिन शासन स्तर पर लोडिंग (परिवहन)कार्य मे ही रोक लगाए जाने के निर्णय ने समितियों को एक बार फिर परेशानी में डाल दिया है।
