जोगीपाली (क) के नाम से झिंका में कर रहे थे अवैध रेत उत्खनन, खनिज विभाग ने बंद कराया घाट !

कोरबा (समाचार मित्र) पंचायतों को दिए जा रहे रेत घाट का दुरुपयोग जमकर किया जा रहा है। ज्यादातर स्थानों पर पंचायत के स्थान पर रेत माफियाओं एवं ठेकदारों ने पंचायत के रेत घाटों पर कब्जा कर लिया है। ऐसा एक मामला जोगीपाली (कनकी) में प्रकाश आया जहां एक्सावेटर जैसे मशीनों से खुलेआम हसदेव नदी का सीना चीरकर बिना रॉयल्टी रेत उत्खनन किया जा रहा था। यही नहीं जोगीपाली (कनकी) के नाम से संचालित रेत घाट में मोहरा पंचायत के भूमि से रेम बनाकर अवैध उत्खनन किया जा रहा था। मामले की सूचना मिलते ही खनिज विभाग के अधिकारियों ने रेत पट्टेदारी के दुरूपयोग के आरोप में रेत घाट को बंद कर दिया है परंतु यह नजारा अन्य रेत घाटों के भी दिखने को मिल रहा है जिसपर खनिज विभाग मेहरबान हैं।
पंचायतों ने किया ठेकदारों से एग्रीमेंट, नियमों का खुला उल्लंघन !
शासन की नियमों के अनुसार ग्राम पंचायतों को ही रेत उत्खनन का पट्टा प्रदान किया जाना था परन्तु खनिज विभाग ने ऐसा शर्त लगा दिया जिससे रेत माफियाओं को रेत घाटों में घुसाया जा सके। विभाग ने 15 लाख रुपए का बैंक गारंटी की शर्त लगा दी जिससे बड़े बड़े ठेकदारों ने मौका पाकर रेत घाटों को अपने कब्जे में ले लिया। जिन पंचायत सरपंचों के पास पैसा नहीं था उनके लिए ठेकदारों ने पैसा जमा कर घाटों को हथिया लिया है। वहीं खनिज उत्खनन के इस नियम शर्त को नहीं मानने वाले ग्राम पंचायत देवलापाठ को रॉयल्टी जारी नहीं की जा रही है। कुल मिलाकर ग्राम पंचायत के नाम से संचालित रेत घाट वास्तव में ठेकेदारों द्वारा संचालित हैं जिसपर खनिज विभाग की मौन स्वीकृति है।















































